श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

24 जनवरी – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

उतरि ठाढ भए सुरसरि रेता ।
सीय राम गुह लखन समेता ।।
केवट उतरि दंडवत कीन्हा ।
प्रभुहि सकुच एहि नहिं कछु दीन्हा ।।
(अयोध्याकाण्ड 101/1)
राम राम 🙏🙏
वन जाते हुए राम जी गंगा के किनारे पहुंचते हैं , केवट से नाव मांगते हैं, केवट ने उनका पद पखार कर उन्हें गंगा पार करा देता है । राम लक्ष्मण, सीता व निषादराज गुह नाव से उतर कर गंगा जी के रेत में खड़े हो जाते हैं, केवट दंडवत् प्रणाम करता है, उसे देखकर राम जी को संकोच होता है कि इसे मैंने कुछ नहीं दिया ।
हम आप केवल परमात्मा से लेने लेने की ही सोचते रहते हैं , परंतु यदि हमारे कर्म उनकी सेवा में लग जाए तो वे हमारे बारे में सोचने के लिए मजबूर हो जाते हैं । अतः पहले अपने को श्री राम सेवा में लगाएं पुनः बहुत कुछ पाएँ । अथ ! जय जय राम , जय जय राम, जय जय श्री सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

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