श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

28 फ़रवरी – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

जल भरि नयन कहहिं रघुराई ।
तात कर्म निज तें गति पाई ।।
परहित बस जिन्ह के मन माहीं
तिन्ह कहुँ जग दुर्लभ कछु नाहीं
( अरण्यकांड 30/4-5)
राम राम 🙏🙏
श्री सीता जी को खोजते हुए श्री राम जी घायल जटायु के पास पहुँचे हैं जो राम दर्शन के लिए जीवित हैं । जटायु जी कहते हैं कि अब आपके दर्शन हो गये , अब चलना चाहूँगा । श्री राम जी ने सजल नेत्रों से कहा कि आपको यह गति आपके कर्मों के कारण मिली है । जिनके मन में दूसरे का हित करना बसता है उनके लिए जगत में कुछ भी दुर्लभ नहीं है ।
परहित क्या नही सुलभ करा सकता है ? श्री राम दर्शन भी करा सकता है । अतएव परहित कर परमात्मा को पा लें । अथ ! भजन करिए…सीताराम जय सीताराम, सीताराम जय सीताराम । श्री राम जय राम जय जय राम । 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

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