श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

12 मार्च – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय। 🙏

बचन कायँ मन मम गति जाही ।
सपनेहुँ बूझिअ बिपति कि ताही ।
कह हनुमंत बिपति प्रभु सोई ।
जब तव सुमिरन भजन न होई ।।
( सुंदरकांड 31/1-2)
राम राम 🙏🙏
श्री हनुमान जी श्री सीता जी का पता लगाकर आ गये हैं , वे श्री राम जी को सब बताते हैं और कहते हैं कि उनका एक एक पल एक एक कल्प के समान बीत रहा है , आप जल्दी चलें , निसाचरो को मार कर उन्हें लिवा आएँ । राम जी हनुमान जी से पूछते हैं कि जो मन , वचन व कर्म से मेरे में लगा हो , क्या उसे स्वप्न में भी विपत्ति पड़ सकती है । हनुमान जी कहते हैं कि प्रभु ! विपत्ति तो तभी पड़ जाती है जब वह आपका सुमिरन , भजन नही करता है ।
🙏प्रभु का सुमिरन व भजन ही विपत्तियों से हमारी रक्षा कर सकता है । जिसने भी अपने को राम सुमिरन व भजन में लगाया वही विपदाओं से पार पाया । अस्तु! राम राम जय सीताराम 🚩🚩🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

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