20 फरवरी – श्रीरामचरितमानस,
नमो राघवाय 🙏
कबि न होउँ नहिं चतुर कहावउँ ।
मति अनुरूप राम गुन गावउँ ।।
कहँ रघुपति के चरित अपारा ।
कहँ मति मोरि निरत संसारा ।।
( बालकांड 11/5)
राम राम 🙏🙏
मानस जी के आरंभ में अपनी काब्य रचना के बारे में बताने बाद गोस्वामी जी कहते हैं कि मैं न तो कवि हूँ, न ही चतुर कहलाता हूँ, केवल अपनी बुद्धि के अनुसार राम जी के गुणों का गान करता हूँ । एकतरफ तो रघुनाथ जी का अपार चरित है और तो दूसरी ओर संसार में आसक्त मेरी बुद्धि है ।
राम चरित अपार है , इसका कोई आर पार नहीं है । हमारी आपकी बुद्धि जगत में लगी हुई है । बस इसे राम गुणगान में लगाना है ।आप जैसे भी हैं , कवि हैं या नहीं, चतुर हैं या नहीं इसकी चिंता छोड़ बस अपने को राम गुणगान में लगा दें , कल्याण ही कल्याण होगा । अस्तु! जय जय राम, जय जय राम 🚩🚩🚩
संकलन तरुण जी लखनऊ

