4 अप्रैल- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
किएँ जाहिं छाया जलद
सुखद बहइ बर बात ।
तस मगु भयउ न राम कहँ
जस भा भरतहि जात ।।
( अयोध्याकाण्ड, दो. 216)
राम राम 🙏 🙏
श्री भरत जी श्री राम जी से मिलने चित्रकूट जा रहें हैं । वे
प्रयागराज में स्नान कर आगे बढ़ते हैं । रास्ते में जहां जहां श्री राम जी रूके थे उन स्थानों को देखकर श्री भरत जी का हृदय श्री राम जी के प्रेम और भक्ति से भर जाता है । उनकी यह दशा देखकर बादल छाया कर देते हैं , सुखदायक हवा बहने लगती है । श्री भरत जी के लिए जैसा सुखदायक रास्ता हुआ वैसा श्री राम जी को भी वन जाते समय नहीं हुआ था ।
यदि श्री राम प्रेम से आप परिपूर्ण हैं तो चर अचर , जड़ चेतन, प्रकृति आदि सभी आपके लिए सुखदायी हो जाती है। श्री राम जी अपने से अधिक अपने भक्त का ध्यान रखते हैं। अस्तु…श्री राम जी से प्रेम करें , अपने हृदयासन में विराजमान करें और निरन्तर भजन करते रहें……. श्री राम जय राम जय जय राम, श्री राम जय राम जय जय राम। सीताराम जय सीताराम, सीताराम जय सीताराम। जय सियाराम जय जय सियाराम, जानकीवल्लभ राजाराम श्री राम जय राम जय जय राम ।
🚩🚩🚩 संकलन तरूण जी लखनऊ

