11 मई – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
हित हमार सियपति सेवकाईं ।
सो हरि लीन्ह मातु कुटिलाई ।।
मैं अनुमानि दीख मन माहीं ।
आन उपायँ मोर हित नाहीं ।।
( अयोध्याकाण्ड 177/1)
राम राम 🙏🙏
श्री दशरथ जी के परलोक गमन के बाद श्री भरत जी को ननिहाल से बुलाया जाता है और गुरुवर वशिष्ठ जी श्री भरत जी को अयोध्या का राज सम्भालने को कहते हैं । श्री भरत जी कहते हैं कि पिताजी स्वर्ग में और श्री सीताराम जी वन में हैं , ऐसे में मुझे आप सब राज सम्हालने के लिए कह रहें हैं । मेरा हित तो सीताराम जी की सेवा में है जिसे माँ की कुटिलता ने छीन लिया है । मैंने विचार कर पाया कि किसी अन्य उपाय से मेरा हित होने वाला नहीं है ।
राज सेवा से बड़ा श्री राम सेवा है । श्री राम सेवा में ही अपना हित निहित है । आप भी श्री भरत जी की तरह विचार कर देखेंगे तो यही पाएंगे । अतः श्री राम सेवा में लगकर अपना हित कर लें । श्री राम सेवा ही परम हितकारी है ऐसा दृढ़ विश्वास करके श्री सीताराम जी को सेवा में लगिए और सीताराम नाम का भजन करते रहिए…… श्री राम जय राम जय जय राम, श्री राम जय राम जय जय राम। सीताराम जय सीताराम जय सियाराम जय जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम। सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम
🚩🚩🚩 संकलन तरूण जी लखनऊ

