05 जून – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
अरथ न धरम न काम रूचि,
गति न चहउँ निरबान ।
जनम जनम रति राम पद,
यह बरदानु न आन ।।
( अयोध्याकाण्ड, दो. 204)
जय सियाराम🙏🙏
श्री भरत जी माताओं, पूज्यपाद गुरू वशिष्ठ व अयोध्या के समाज के साथ श्री राम जी से मिलने चित्रकूट जा रहें हैं । वे रास्ते में प्रयाग पहुँचते हैं , त्रिवेणी जी में स्नान करते हैं और त्रिवेणी जी से प्रार्थना कर माँगते हैं कि मुझे धर्म अर्थ व काम की इच्छा नहीं है, न ही मैं मोक्ष चाहता हूँ । मेरा जन्म जन्मांतर केवल श्री राम चरणों में प्रेम हो , यही वरदान आपसे माँगता हूँ अन्य कुछ भी मुझे नहीं चाहिए ।
प्रेमियों ! हम सब का श्री राम चरणों में प्रेम इसलिए नहीं होता है क्योंकि हमें सभी सांसारिक वस्तुओं के पाने की अदम्य लालसा बनी रहती है। हम हर समय सकाम रहते हैं परन्तु सर्वदाता श्री सीताराम जी के चरणों में प्रेम नहीं करते है, अतः हम सब भी श्री राम चरणों में समर्पण करेंगे और श्री सीताराम जी से निश्छल और निष्काम भाव से भरत भैया की तरह प्रेम करेंगे तो जो कुछ भी हमारे हित में होगा वो सभी इच्छा पूर्ण होगा इसलिए केवल और केवल श्री राम चरणों में प्रेम और समर्पण से ही सब कुछ पाया जा सकता है इसके लिए सीताराम जी का रूप गुण और नाम का निरन्तर चिंतन करते रहना पड़ेगा….. श्री राम जय राम जय जय राम, श्री राम जय राम जय जय राम। सीताराम जय सीताराम सीताराम जय सीताराम जय सियाराम जय जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम। जय रघुनंदन जय सियाराम, पतित पावन सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

