31 अगस्त- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
अरथ न धरम न काम रुचि
गति न चहउँ निरबान ।
जनम जनम रति राम पद
यह बरदानु न आन ।।
( अयोध्याकाण्ड, दो. 204)
राम राम 🙏🙏
श्री राम जी से चित्रकूट मिलने जाते हुए श्री भरत जी त्रिवेणी पहुँचते हैं । त्रिवेणी में स्नान कर वे कहते हैं कि हे तीर्थराज! आप समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाले हैं, मेरी भी मनोकामना आप पूर्ण करें । मुझे न अर्थ की रुचि है , न धर्म की , न काम की , न ही मोक्ष चाहता हूँ । हर जन्म में मेरा श्री राम चरणों में प्रेम हो , दूसरा कुछ नहीं , केवल यही वरदान आपसे मैं माँगता हूँ ।
आत्मीय जनों ! श्री राम चरणों का प्रेमी श्री राम चरणों को ही चाहता है, उसके लिए अन्य सब कुछ गौण होता है । श्री राम चरणों में प्रेम एवं समर्पण से ही हम सब की सभी प्रकार की इच्छाओं की पूर्ति हो जाती है, श्री सीताराम चरणों की प्रीति पाने के लिए सतत श्री सीताराम नाम का भजन करते रहिए । अथ…….श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम, 🚩🚩🚩 संकलन तरूण जी लखनऊ

