11मार्च : श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
जेहि बिधि होइहि परम हित,
नारद सुनहु तुम्हार ।
सोइ हम करब न आन कछु,
बचन न मृषा हमार ।।
( बालकांड, दो. 132)
राम राम जी🙏🙏
एक बार नारद जी को मोह हो गया था कि उन्होंने काम को जीत लिया है, उसे दूर करने के लिए भगवान ने माया का एक नगर की रचना रच डाली । शीलनिधि राजा की कन्या पाने के लिए नारद जी ने भगवान से मदद माँगी । भगवान ने कहा कि नारद जी ! आपका जैसे भी परम हित होगा , हम वही करेंगे, दूसरा कुछ नहीं । मेरे बचन असत्य नहीं होते हैं ।
बंधुवर ! हम तो बस अपना हित कर सकते हैं परंतु भगवान परम हित करते हैं । अतः आपके जीवन में जो भी घटित हो रहा है उसमें अपना परम हित मानकर उसे भगवत् प्रसाद रूप में स्वीकार करें । अथ….श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम। सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरुण जी लखनऊ

