12 मार्च – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
उमा राम की भृकुटि बिलासा ।
होइ बिस्व पुनि पावइ नासा ।।
तृन ते कुलिस कुलिस तृन करई
तासु दूत पन कहु किमि टरई।।
( लंकाकांड 34/4)
जय श्री सीताराम🙏🙏
अंगद ने रावण के दरबार में क्रोध करके अपने पाँव पृथ्वी पर जमा देते हैं, सबने कोशिश की है पर कोई हिला तक नहीं पाया, रावण के आने पर अंगद ने यह कह कर उसे लज्जित कर दिया कि मेरे नहीं , श्री राम जी के चरण पकड़ो, कल्याण होगा। भगवान शिव जी कहते हैं कि पार्वती! श्री राम जी के भौंह के इशारे से विश्व उत्पन्न व नाश को पाता है । जो तृण को वज्र एवं वज्र को तृन बना देते हैं , उसके दूत का प्रण भला कैसे टल सकता है ।
बंधुवर ! श्री राम जी सबल को निर्बल व निर्बल को सबल बना देते हैं परंतु अपने दूत को केवल प्रबल बनाते हैं, उसकी इच्छा को अपनी इच्छा मान कर उसे पूरा करते हैं । अतः श्री राम दूत बनें और श्री राम जी के कृपा पात्र बनें। इसके लिये केवल श्री सीताराम नाम का भजन करते रहें। अस्तु….श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरुण जी लखनऊ

