श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

05 दिसंबर – श्रीरामचरितमानस,
नमो राघवाय !! 🙏

छिति जल पावक गगन समीरा ।
पंच रचित यह अधम सरीरा ।।
प्रगट सो तनु तव आगें सोवा ।
जीव नित्य केहि लगि तुम्ह रोवा
( किष्किंधाकांड 10/2-3)
राम राम 🙏🙏
राम जी ने बालि का बध कर उसे अपने धाम भेज दिया है। पूरे नगर में यह समाचार फैल जाता है । बालि की पत्नी तारा विलाप करती है । उसे व्याकुल देख राम जी ने उसे समझाते हैं । वे कहते हैं कि पृथ्वी, जल , अग्नि, आकाश व वायु से यह अधम शरीर बना हुआ है । इन पाँच तत्वों से निर्मित बालि का शरीर तुम्हारे सामने पड़ा हुआ हैं तथा इसमें रहने वाली आत्मा तो नित्य है , फिर तुम किसके लिए रो रही हो ?
हम आप सदा जो अनित्य है उसके के लिए रोते परेशान रहते हैं । रोना ही है तो राम के लिए रोवें , रामत्व के लिए रोवें जिससे हमें उनकी कृपा प्रसाद मिल सके व हमारा कल्याण हो सके । अतएव ! राम राम जय राम राम 🚩🚩🚩
6 जनवरी – श्रीरामचरितमानस,
नमो राघवाय 🙏

कपि बल देखि सकल हियँ हारे ।
उठा आपु कपि कें परचारे ।।
गहत चरन कह बालिकुमारा ।
मम पद गहें न तोर उबारा ।।
( लंकाकांड 34/1)
राम राम 🙏🙏
राम जी ने अंगद को दूत बनाकर लंका भेजा है । अंगद रावण को समझाने की बहुत कोशिश करते हैं पर वह मानता नहीं है । रावण ने निसाचरों को अंगद का बध करने की आज्ञा दी है । अंगद जी ने रावण की सभा में अपना पाँव जमा दिया और कहा कि यदि तुम सब मेरा चरण हटा सको तो राम जी सीता के बिना लौट जाएँगे । सभी प्रयास करते हैं पर कोई सफल नही होता है ।अंगद के बल को देखकर सभी हार मान लेते हैं । तब अंगद जी के ललकारने पर रावण स्वयं उठता है । जब वह अंगद का पैर पकड़ने के लिए झुकता है तब अंगद जी कहते हैं कि मेरा पावँ पकड़ने से तेरा भला नहीं होगा जाके राम जी के चरण पकड़ , तेरा भला हो जाएगा ।
हमारी आपकी कुशलता तो राम चरणों में लगने , उसे पकड़ने व उसे पकड़े रहने में हैं पर हमने तो राम चरणों की जगह क्या क्या पकड़ रखा है इसीलिए असफलता ही हाथ लगी हुई है । अस्तु ! अपनी भलाई चाहते हैं तो पकड़ बस राम चरण , पकड़ बस राम चरण 🚩🚩🚩

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