हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत शहर की सुप्रिसिद्ध साहित्यिक संस्था लेखिका संघ बरेली के तत्वावधान में रॉयल रेस्टोरेंट राजेंद्र नगर में काव्य गोष्ठी का आयोजन सम्पन्न
बरेली:कल दिनांक 15 सितम्बर को हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत शहर की सुप्रिसिद्ध साहित्यिक संस्था लेखिका संघ बरेली के तत्वावधान में रॉयल रेस्टोरेंट राजेंद्र नगर में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता लेखिका संघ की संरक्षक श्रीमती निर्मला सिँह ने की। वरिष्ठ गीतकार कमल सक्सेना की वाणी वंदना से काव्य गोष्ठी का शुभारम्भ हुआ। काव्य गोष्ठी में स्वर्गीय नाथू राम अग्निहोत्री नम्र जी सम्मान कवि संगीतकार मोहन चंद्र पांडे को व स्वर्गीय उमा पांडे सम्मान से श्रीमती रीता शर्मा व.शाहजहांपुर से आयी पूनम दीक्षित को शाल ओढाकर व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया जिसे दीप्ती पांडे व उनके परिवार के सदस्यों द्वारा दिया गया।
कमल सक्सेना ने हिंदी के प्रति अपने भाव इस तरह व्यक्त किये,,,
क्यों देश में हिंदी का कोई मान नहीं है। अपने ही घर में अपनी ही पहचान नहीं है। आती है एक साल में सप्ताह के लिये ये है हमारी माँ कोई मेहमान नहीं है।
संस्था अध्यक्ष और गोष्ठी की आयोजक दीप्ती पांडे नूतन ने कहा कि,,,
सुन इंग्लिश तुझे ऐसी मैं आज फटकार दूँ। मेरा बस चले तो तुझे आज ही देश से निकाल दूँ। हिंदी बोल क्यों लजाती है अति।
मुझे तो घृणा है बस इंग्लिश के प्रति
हिमांशु श्रोत्रिय निष्पक्ष ने सनातन पर अपनी कविता इस तरह से पढ़ी,,,,
बहुत पावन बहुत अद्भुत बहुत प्यारी कहानी है,
युगों से आ रहे सुनते युगों तक ही सुनानी है।
सचाई को सही ढँग से ज़माना जान ले सारा,
कि भारत भू सनातन की सनातन राजधानी है।
निर्मला सिँह ने अपनी ग़ज़ल कुछ ऐसे पढ़ी,,
शाम होते ही मेरे हालात बदल जाते हैं ।
और पलकों पर सितारे सी मचल जाते हैं ।
यूं ही आबाद नहीं है शहर मेरे लोगों।
कितने ही गांव के गांव मसल जाते हैं।।
राजेश गौड़ ने अपनी कविता पढ़ते हुए कहा कि,,
मौत का कोई दोस्त नहीं होता। छूट जाये इससे ऐसा कोई घर नहीं होता। लोग रोते है बिलखते हैँ ये वो सफर है जिसमें कोई हमसफर नहीं होता
अंशु गुप्ता ने हिंदी के प्रति अपने भाव इस तरह व्यक्त किये,, मैं हिंदी हूँ तुम्हारी अपनी, मुझे पहचाना है तुमने माँ कि कोख में, उलझे सवालों के शब्दकोष में, चढ़ती बेल सी तेरे हृदय में हूँ, मैं हिंदी हूँ।
मीरा प्रियदार्शनी ने प्यार की भावना कुछ ऐसे कही,,,,, इश्क़ तो एहसास है जो दिल से दिल को छू जाये।
डॉ किरण कैंथवाल ने हिंदी पर अपनी कविता पढ़ते हुए कहा कि,,,
हिंदी की महिमा मैं क्या गाऊँ भारत माँ की बिंदी है। ये भारत माँ के माथे लगाऊं।
मीना अग्रवाल ने ग़ज़ल पढ़ते हुए कहा कि,,, रेत पर होले से लिखा था तेरा नाम जाने कब पत्थर की लकीर हो गया। हमने जो चुपके से गाया था कभी नगमा वही मेरी तक़दीर हो गया। काव्य गोष्ठी में राजेश गौड, कमल सक्सेना,हिमांशु श्रोत्रिय निष्पक्ष,इंद्र देव त्रिवेदी, अविनाश अग्रवाल, मोहन चंद्र पांडे, एस के कपूर श्री हंस, निर्मला सिँह, दीप्ती पांडे, किरण कैंथवाल, मीरा प्रियदार्शनी, मीना अग्रवाल अंशु गुप्ता,शैलजा मिश्रा, रीता शर्मा व पूनम दीक्षित आदि कवियों ने अपने अपने काव्य पाठ से मंत्र मुग्ध कर दिया। काव्य गोष्ठी का संचालन इंद्र देव त्रिवेदी ने किया। करुण कुमार पांडे और पूजा पांडे ने सभी का आभार प्रकट किया।
🌎 के पी सक्सेना कवि गीतकार बरेली 🌎

