अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय माउंट आबू राजस्थान की वरिष्ठ राजयोगिनी उषा दीदी ने “चले राम राज्य की ओर” कार्यक्रम का किया समापन

अयोध्या (संवाददाता) सुरेंद्र कुमार। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय आबू पर्वत राजस्थान से अयोध्या क्षेत्रीय बोर्डिंग हाउस में वरिष्ठ राजयोगिनी उषा दीदी जी के आगमन पर बीके मुकेश भाई और अन्य महान गण द्वारा भव्य स्वागत किया गया आओ चलें रामराज की ओर कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ राजयोगिनी उषा दीदी जी ने मां सरस्वती जी पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया सभी आए महान गढ़ को माल्यार्पण कर अंग वस्त्र एवं सप्रेम भेंट कर सम्मानित किया गया।इस कार्यक्रम के अवसर पर प्रजापति ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय का नृत्य संगीत प्रस्तुत किया गया और संवाद में बताया गया कि आज आपको अवगत कराते हुए अपार हर्ष हो रहा है कि अंतरराष्ट्रीय अध्यात्मिक संस्था प्रजापति ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विद्यालय सेवाओं की उद्धार हेतु इस सनातम कलयुग काल में आध्यात्मिक एवं नैतिक मूल्यों,सद्गुणों से विमुख मानव मन को सकारात्मक दिशा एवं दिव्य ऊर्जा प्रदान करने हेतु कार्यक्रम आयोजित किया गया। देश की उपासना लाइव चैनल के रिपोर्टर सुरेंद्र कुमार से खास मुलाकात बीके मुकेश भाई से हुई जिसमें बीके मुकेश भाई ने ईश्वरीय विश्वविद्यालय के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी लोगों को दी और बताया यह ईश्वरीय विश्वविद्यालय एक अनोखे प्रकार का यज्ञ भी है इसी यज्ञ की अग्नि से ना केवल प्रदूषण नष्ट होता है बल्कि सुगंधित वातावरण का निर्माण भी होता है। इस महायज्ञ की ज्ञानी और योगिनी से विश्व की कुर्तियां, दूषित संस्कार, बुरे विचार, पापाचार तथा भ्रष्टाचार नष्ट हो जाते हैं और एक नए समाज नए विश्व का निर्माण होता है जिसे सतयुगी संसार कहा जाता है,उस संसार में नर नारी देवी एवं देवता के समान होते हैं यह विश्वविद्यालय एक रूहानी अस्पताल अथवा आत्माओं का औषधालय भी है। आत्माएं जो काम, क्रोध लोभ ,मोह, अहंकार आदि रोग से पीड़ित है उनका उपचार यहां ज्ञान की औषधि, योग की इंजेक्शन तथा पवित्रता की धारणा से किया जाता है। यह ईश्वरीय विश्वविद्यालय सही अर्थ में सभी वर्गों के लिए है जहां जात पात या भाषा धर्म और देश विदेश का भेदभाव नहीं किया जाता है जहां सभी प्रकार के साथ आत्मिक नाते से भाई-भाई मानकर व्यवहार होता है और विश्व को एक कुटुंब मानकर विश्व बंधुत्व की शिक्षा दी जाती है। इस ईश्वरीय विश्वविद्यालय की शिक्षार्थी मानव विकारों के डूबते हुए विश्व रुपी बेड़े को निकालने वाले एवं पवित्र बनाने के कार्य में सहायक रूहानी खिवैया है और आध्यात्मिक नियमों रूपी अनुशासन का पालन करने हेतु विषय विकारों एवं ईश्वरीय ज्ञान के अस्त्रो एवं योग बल से विजय प्राप्त करते हैं, यह एक प्रकार से पावन संगम भी है जहां ज्ञान-गंगाओं का परमात्मा रूपी ज्ञान सागर से मिलन-मेला होता है यहां के विद्यार्थी ज्ञानगंगा बनकर सारे विश्व को पावन बनाने की श्रेष्ठ सेवा करते हैं। इस प्रकार विश्वविद्यालय एक ज्ञान नाव भी है जिसका खिवैया विश्व पिता परमात्मा है जिसके द्वारा नर-नारी विषय सागर को पार कर पवित्र स्वर्ग की सृष्टि अर्थात सतयुगी की दुनिया में प्रवेश करते हैं। इसे हम ईश्वरीय विश्वविद्यालय इसलिए कहते हैं क्योंकि विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं सर्व आत्माओं के परमपिता परमात्मा है जो सृष्टि के आदि मध्य अंत की बेहद ही पढ़ाई पढ़ाते हैं जो सर्व मानव मात्र के लिए है। इस आध्यात्मिक पढ़ाई से विश्व में ऐसा परिवर्तन है होता है जो कलयुग बदल सतयुग आ जाता है और सारे विश्व में पवित्रता सुख शांति की पुनर्स्थापना होती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *