अयोध्या (संवाददाता) सुरेंद्र कुमार।
अयोध्या राम लला का जन्मोत्सव छप्पन भोग लगाकर बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। वही अयोध्या दतौली धाम सरकार के ज्योतिषाचार्य ओम नारायण दास जी महाराज ने बताया कि चैत्य मास के शुक्ल पक्ष की तिथि को राम नवमी मनाई जाती है। हिंदू धर्म में राम नवमी का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन ही मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्म राजा दशरथ के घर पर हुआ था। अर्धम का नाश करने के लिए इस दिन भगवान राम ने लिया था त्रेता युग में रावण का आतंक बहुत बढ़ गया था। सभी देवी-देवता और पृथ्वी वासी रावण की वजह से त्रस्त थे। उस समय अयोध्या के राजा दशरथ थे। राजा दशरथ के यहां कोई पुत्र नहीं था। तब उन्होंने पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया। इस यज्ञ से खीर उत्पन्न हुई। इस खीर का सेवन दशरथ की तीनों रानियों कौशल्या, कैकयी और सुमित्रा ने किया। इसके प्रभाव से कौशल्या ने श्रीराम को, कैकयी ने भरत को, सुमित्रा ने लक्ष्मण और शत्रुघ्न को जन्म दिया। भगवान विष्णु ने रावण का अंत करने के लिए श्रीराम के रूप में अवतार लिया। इस दिन प्रभु श्रीराम की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की जाती है। इस साल चैत्र नवरात्रि अप्रैल माह से शुरू होती है।गोस्वामी तुलसीदास ने महाकाव्य रामचरितमानस की रचना में अयोध्या में इसी शुभ मौके पर शुरू की थी। इसलिए अयोध्या नगरवासियों और रामभक्तों के लिए इस दिन का विशेष महत्व होता है। भारत ही नहीं विदेश में यह पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। रामनवमी के मुहूर्त को शुभ कार्यों के लिए बहुत ही खास माना जाता है। इस दिन सभी मांगलिक कार्य बिना सोचे समझे कर सकते हैं। गृह प्रवेश, दुकान या व्यसाय का मुहूर्त भी इस दिन लोग करवाते हैं। इस मंत्र से पूजा शुरू करें-
ओम शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे, सर्व स्थार्ति हरे देवि नारायणी नमस्तुते।गोस्वामी तुलसीदास ने महाकाव्य रामचरितमानस की रचना में अयोध्या में इसी शुभ मौके पर शुरू की थी। इसलिए अयोध्या नगरवासियों और रामभक्तों के लिए इस दिन का विशेष महत्व होता है। भारत ही नहीं विदेश में यह पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। रामनवमी के मुहूर्त को शुभ कार्यों के लिए बहुत ही खास माना जाता है। इस दिन सभी मांगलिक कार्य बिना सोचे समझे कर सकते हैं। गृह प्रवेश, दुकान या व्यवसाय का मुहूर्त भी इस दिन लोग करवाते हैं।

