अयोध्या में नौकाविहार अब केवल सैर नहीं,सांस्कृतिक अनुभव भी बनेगा
(डाक्टर अजय तिवारी जिला संवाददाता)
अयोध्या।अयोध्या में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या को देखते हुए उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने सरयू नदी में नौकाविहार को और अधिक रोचक, सुरक्षित एवं सांस्कृतिक अनुभव से समृद्ध बनाने की दिशा में अहम पहल की है। इसी क्रम में अयोध्या में सरयू नदी पर नौकायन करने वाले नाविकों के लिए तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम (15 से 17 जनवरी) आयोजित किया गया। पर्यटन मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ये नाविक अयोध्या की समृद्ध सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पौराणिक विरासत के प्रतिनिधि के रूप में भी अपनी भूमिका निभाएंगे। नौकाविहार के दौरान श्रद्धालुओं को घाटों की प्राचीनता, सरयू नदी का धार्मिक महत्व, और अयोध्या से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंग सुनाए जाएंगे, जिससे पर्यटकों को एक सजीव सांस्कृतिक अनुभव प्राप्त होगा।उन्होंने बताया कि प्रदेश में तेजी से विस्तार ले रहे वाटर टूरिज्म को सुरक्षित स्वरूप देने के लिए उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग लगातार ठोस कदम उठा रहा है। नाविकों के कौशल विकास और सशक्तिकरण की यह पहल सरकार की दीर्घकालिक सोच को दर्शाती है।लाइव टाइम्स से खास बातचीत में प्रशिक्षण ले रहे नाविकों ने बताया कि उन्हें श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए यह सिखाया गया है कि घाटों की ऐतिहासिकता और पौराणिक महत्व को रोचक कहानियों के रूप में कैसे प्रस्तुत किया जाए। नाविकों ने कहा कि अब वे पर्यटकों से संवाद, शिष्टाचार, व्यवहार और आपात स्थिति में प्रतिक्रिया जैसे विषयों पर पहले से अधिक आत्मविश्वास महसूस कर रहे हैं।नाविकों ने यह भी बताया कि प्रशिक्षण के पहले दिन अयोध्या के जिलाधिकारी निखिल टीकाराम फुंडे स्वयं कार्यक्रम में पहुंचे और उन्होंने सुरक्षा, जिम्मेदारी और पर्यटकों के साथ व्यवहार को लेकर महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। नाविकों को स्टोरीटेलिंग का प्रशिक्षण दे रहे मास्टर ट्रेनर गौरव श्रीवास्तव ने बताया कि सरयू घाट के 55 नाविकों के इस पहले समूह को प्राकृतिक आपदाओं से बचाव, डूबते श्रद्धालुओं को बचाने के उपाय, और दुर्घटना से पहले की सुरक्षा तैयारियों पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया। उन्होंने बताया कि दूसरे दिन चिकित्सकों द्वारा प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। गौरव श्रीवास्तव ने कहा, “नाविक स्थानीय हैं और अयोध्या की कहानियों को पहले से जानते हैं। हमारा प्रयास है कि वे इन कथाओं को श्रद्धालुओं के सामने प्रभावशाली और भावनात्मक रूप में प्रस्तुत कर सकें।”उन्होंने यह भी जानकारी दी कि यह प्रशिक्षण केवल शुरुआत है। आगामी चरण में अयोध्या के अन्य घाटों, विशेषकर गुप्तारघाट पर कार्यरत नाविकों को भी इसी तरह प्रशिक्षित किया जाएगा। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम अयोध्या के होटल साकेत में आयोजित किया गया है, जिसका उद्देश्य नाविकों को केवल नाव चलाने तक सीमित न रखकर उन्हें डिजिटल पेमेंट, स्टोरीटेलिंग, आपदा प्रबंधन, प्राथमिक उपचार और पर्यटक व्यवहार जैसी आवश्यक दक्षताओं से लैस करना है। उन्होंने कहा कि सरयू नदी पर नौकायन को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना सरकार की प्राथमिकता है। पर्यटन को केवल भ्रमण नहीं, बल्कि संस्कृति और सुरक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से मान्यवर कांशीराम पर्यटन प्रबंधन संस्थान (एमकेआईटीएम) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल के संयुक्त सहयोग से कुल 55 नाविकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।तीन दिवसीय इस कार्यशाला के माध्यम से अयोध्या में नौकाविहार अब केवल नदी भ्रमण नहीं, बल्कि सुरक्षा, संस्कृति और संवाद का समन्वित मॉडल बनेगा।यह पहल न केवल श्रद्धालुओं के अनुभव को समृद्ध करेगी, बल्कि स्थानीय नाविकों को आत्मनिर्भर और पेशेवर बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

