अयोध्या 84 कोसी परिक्रमा में पधारे संतों का दर्शन तथा विशाल भण्डारा: डॉक्टर स्वामी भगवदाचार्य जी महाराज

ब्यूरो चीफ आर एल पाण्डेय

गोण्डा। डॉक्टर स्वामी भगवदाचार्य जी महाराज ने बताया कि सनातन धर्म परिषद एवं श्री तुलसी जन्मभूमि न्यास के तत्वावधान में गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली राजापुर सूकरखेत गोण्डा में कई वर्षों से विश्व तुलसी सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में पहला सम्मेलन तुलसी जन्मभूमि राजापुर सूकरखेत, गोण्डा, दूसरा उत्तरी भारत कालेज भाण्डुप मुंबई, तीसरा योग शक्तिपीठ कुतुबमीनार महरौली नई दिल्ली तथा चौथा सम्मेलन महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी में हुआ था। यह पांचवा सम्मेलन श्रीरामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास की जन्मभूमि राजापुर सूकरखेत, गोण्डा में सम्पन्न होने जा रहा है। इसमें देश विदेश के प्रोफेसर, कुलपति तथा विदेशी विद्वान भी पधार रहे हैं। सम्मेलन के अन्तर्गत तुलसी साहित्य-वैश्विक परिदृश्य, वसुधैव कुटुम्बकम् की अवधारणा और तुलसी साहित्य, विदेशी विद्वानों की दृष्टि में गोस्वामी तुलसीदास भारतीय संस्कृति के संरक्षक गोस्वामी तुलसीदास और रामकथा के वैश्विक संदर्भ आदि विषयों पर व्याख्यान होंगे। कार्यक्रम में पधारे देश और विदेश से प्राख्यात विद्वान तुलसीदास वैश्विक परिवेश पर अपने विचार व्यक्त करेंगे। सम्मेलन में अन्य बातों के अलावा इस विषय पर भी चर्चा होगी कि तुलसी ने भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में क्या योगदान दिया है।

जैसा कि आप सब जानते हैं कि गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना करके सनातन धर्म के मूल्यों की रक्षा की है। रामचरितमानस की लोकप्रियता दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। यह भारतीय संस्कृति का मानक ग्रन्थ है। गोस्वामी तुलसीदास का जन्म अयोध्या के पास गोण्डा जिले के राजापुर सूकरखेत, गोण्डा में श्रावण शुक्ल सप्तमी को हुआ था। गोस्वामी जी का ननिहाल दधिवल कुण्ड दहौरा मिलीरावासू हुलसीधाम बहराइच में था गोस्वामी जी का जन्म गोण्डा जिले के परसपुर विकास खण्ड में नरहरिदास आश्रम पसका सूकरखेत के पास राजापुर में हुआ था। गोस्वामी जी ने रामचरित मानस में संकेत किया है कि-

मैं पुनि निज गुरू सन सुनी कथा सो सूकरखेत ।

समुझी नहिं तसि बालपन तब अति रहेउँ अचेत ।।

नरहरिदास आश्रम के पास ही बाराह भगवान का स्थान है। यहां की भाषा अवधी है। यह स्थान अवध के अन्तर्गत है। इसलिए निःसंदेह तय है कि गोस्वामी तुलसीदासका जन्म राजापुर सूकरखेत में हुआ था। पास में सरयू घाघरा का संगम स्थान है। बचपन में अनाथ गोस्वामी तुलसीदास को उनके गुरु ने शरण दिया था वहीं उनका पालन पोषण हुआ था। उनके गुरू नरहरिदास जी के देखरेख में पालन-पोषण हुआ। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास को वाराणसी भेजकर शिक्षा दीक्षा की व्यवस्था की। गोस्वामी तुलसीदास बाल ब्रह्मचारी एवं अविवाहित थे। उन्होंने ब्याह न बरेखी का संकेत किया। आशा है कि पंचम विश्व तुलसी सम्मेलन से अच्छा संदेश जाएगा। गोस्वामी जी के बारे में जो कुछ थोड़ी भ्रान्तियां हैं वह दूर हो जायेंगी। गोस्वामी तुलसीदास के जन्मस्थान राजापुर में विद्यमान मंदिर का सौन्द्रयीकरण किया जा रहा हैं यहां पर एक विशाल सभागार का निर्माण कराया जा रहा है। यहां रामचरितमानस का अखण्ड पाठ हो रहा है। हम लोग इस बात के लिए प्रयास कर रहे हैं कि गोस्वामी जी के नाम पर एक विश्वविद्यालय हो उसके लिए राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार को लिखा गया है। राज्य सरकार ने विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए तुलसी जन्मभूमि के पास परसपुर विकास खण्ड में 58 एकड भूमि अधिग्रहण कर लिया है। उम्मीद है कि इस विश्वविद्यालय का नाम गोस्वामी तुलसीदास के नाम पर रखा जायेगा। पंचम विश्व तुलसी सम्मेलन में औपचारिक प्रस्ताव पारित किया जायेगा और सरकार को भेजा जायेगा। इस आयोजन में जो भी विद्वान आ रहे है उन्हें गोस्वामी तुलसी के गुरू नरहरिदास के आश्रम पसका सूकरखेत ले जाकर दर्शन कराया जायेगा। वहां पर रामचरित मानस की प्राचीन पाण्डुलिपि विद्यमान हैं। हमें यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि गोस्वामी तुलसीदास के पिता आत्माराम दूबे के नाम 45 बीघा जमीन में तुलसीवन लगाया गया है। इसका अवलोकन करेंगे। पास में पूर्वोत्तर योग के प्रणेता महर्षि पतंजलि की जन्म भूमि पतंजलिपुरी कोडर गोण्डा का भी अवलोकन कराया जायेगा। यह आयोजन पंचम विश्व सम्मेलन 19 अप्रैल को 11:30 बजे उद्घाटन तथा 20 अप्रैल सायं 4:00 बजे से अखिल भारतीय सम्मेलन एवं 21 को 11:00 समापन तथा 21 सायं 6:00 बजे से विशाल भण्डारा का आयोजन किया गया है। देश विदेश के साधु संतो एवं भक्तजनों का अयोध्या 84 कोसी परिक्रमा में पधारे संतों का दर्शन तथा विशाल भण्डारा किया जायेगा।

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