उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक वर्कर्स एवं ऑफिसर आर्गेनाईजेशन ने मुख्यालयों पर धरना एवं वित्त मंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा

उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक वर्कर्स एवं ऑफिसर आर्गेनाईजेशन
ने मुख्यालयों पर धरना एवं वित्त मंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा

सिटी रिपोर्टर प्रत्यूष पाण्डेय

लखनऊ। देश की जनता एवं संबंधित शासकीय तंत्र का ध्यान देशभर के क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ हो रही दीर्घकालिक अन्यायपूर्ण स्थिति की ओर आकृष्ट कराना चाहते हैं।
इन कर्मचारियों की निरंतर और न्यायोचित मांगों की अनदेखी तथा संवाद की अनुपस्थिति को देखते हुए, अखिल भारतीय ग्रामीण बैंक अधिकारी संगठन (AIGBOO) तथा अखिल भारतीय ग्रामीण बैंक वर्कर्स संगठन (AIGBWO) — जो कि भारतीय मजदूर संघ (BMS) से संबद्ध हैं — ने एक चरणबद्ध आंदोलन आरंभ करने का निर्णय लिया है, ताकि RRB कर्मचारियों की ज्वलंत समस्याओं को उजागर किया जा सके।

आंदोलन की रूपरेखा:
• 1 एवं 2 जुलाई 2025: काली पट्टी लगाकर विरोध
• 14 जुलाई 2025: मध्याह्न / कार्यदिवस अंत में प्रदर्शन और वित्त सचिव के नाम ज्ञापन सौंपना
• 25 जुलाई 2025: RRB मुख्यालयों पर धरना एवं वित्त मंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपना
• 22 अगस्त 2025: एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल
प्रथम एवं द्वितीय चरण दिनांक 01-02 जुलाई एवं 14 जुलाई के उपरांत तृतीय चरण में पूरे देश में आज दिनांक 25-07-2025 को सभी ग्रामीण बैंकों के प्रधान कार्यालय पर अपनी मांगो के समर्थन में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन कर माननीय वित्त मंत्री भारत सरकार के नाम ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम किया जा रहा है| इसके आगे यदि मांगों को पूरा नहीं किया जाता है तो दिनांक 22-08-2025 को राष्ट्रव्यापी एक दिवसीय हड़ताल की जाएगी|
मुख्य मांगें:
1. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के IPO प्रस्ताव को तत्काल वापस लिया जाए ताकि इन बैंकों की ग्रामीण और सार्वजनिक प्रकृति बनी रहे।
2. स्थानांतरण नीति की विसंगतियों को दूर किया जाए।
3. सेवा शर्तों में पूर्ण समानता (अवकाश नियम, स्टाफ ऋण, लीज आवास, भत्ते आदि) लागू की जाए और 12वां द्विपक्षीय एवं 9वां संयुक्त नोट बिना किसी विचलन के लागू किया जाए।
4. पर्याप्त भर्ती की जाए एवं पदोन्नति नीति को वाणिज्यिक बैंकों के अनुरूप किया जाए।
5. “राष्ट्रीय ग्रामीण बैंक” का गठन किया जाए जिसमें प्रत्येक RRB का राज्य-आधारित संचालन क्षेत्र यथावत रहे।
6. दीर्घकाल से कार्यरत अस्थायी कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जाए।
7. सभी परिलाभों का खर्च बैंक प्रबंधन द्वारा वहन किया जाए।
8. RRB ट्रेड यूनियनों को IBA के साथ होने वाली सभी वार्ताओं में शामिल किया जाए एवं प्रमुख पदाधिकारियों को विशेष अवकाश प्रदान किया जाए।
9. पाँच-दिवसीय बैंकिंग और पुरानी पेंशन योजना जैसी लंबित मांगों को तुरंत लागू किया जाए।

यह आंदोलन किसी प्रकार की राजनीतिक प्रेरणा से नहीं, बल्कि न्याय, गरिमा और समानता के लिए हमारी नैतिक और व्यावसायिक बाध्यता है। हम भारत सरकार, वित्त मंत्रालय और नाबार्ड से अपील करते हैं कि वे त्वरित हस्तक्षेप कर संवाद की प्रक्रिया शुरू करें और इन मुद्दों का समाधान करें। अन्यथा, हम अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के अंतर्गत इस आंदोलन को और अधिक तेज़ करने के लिए विवश होंगे।

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