औद्योगिक क्षेत्रों की जर्जर सड़कें: विकास पर सवाल
मुंबई ब्यूरो चीफ़ – धनन्जय विश्वकर्मा
महाराष्ट्र, भारत का एक प्रमुख औद्योगिक राज्य है, लेकिन यहां के औद्योगिक क्षेत्रों की सड़कों की खराब हालत एक बड़ी समस्या बनी हुई है। लाखों श्रमिक, जो राज्य के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, हर दिन इन टूटी हुई सड़कों से जूझते हैं। यह एक दुर्भाग्यपूर्ण विरोधाभास है कि जहां एक ओर राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने वाले उद्योग स्थापित हैं, वहीं दूसरी ओर बुनियादी ढांचा पूरी तरह से जर्जर है।
महाराष्ट्र के हर औद्योगिक क्षेत्र में, चाहे वह पुणे, मुंबई, औरंगाबाद या नागपुर हो, श्रमिकों को हर महीने अपनी आय से प्रोफेशनल टैक्स के रूप में ₹200 का भुगतान करना पड़ता है। यह कर सरकार द्वारा बुनियादी सुविधाओं के रखरखाव और सुधार के लिए एकत्र किया जाता है। हालांकि, इन निधियों का उपयोग श्रमिकों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए नहीं हो रहा है। सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं, जो न केवल वाहनों को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि श्रमिकों के लिए भी खतरनाक हैं। मानसून के दौरान स्थिति और भी बदतर हो जाती है, जब सड़कें तालाब में बदल जाती हैं और जल निकासी की व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो जाती है।
यह सिर्फ सड़कों का मुद्दा नहीं है; यह श्रमिकों के जीवन की गुणवत्ता का भी सवाल है। जिन क्षेत्रों में ये श्रमिक रहते हैं, वहां पानी, बिजली, और स्वच्छता जैसी मूलभूत सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं हैं। टूटी हुई जल निकासी प्रणालियों के कारण गंदा पानी सड़कों पर जमा हो जाता है, जिससे बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ जाता है। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को साफ पानी के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है।
इस स्थिति से श्रमिकों के बीच निराशा और असंतोष बढ़ रहा है। वे महसूस करते हैं कि उनके योगदान को महत्व नहीं दिया जा रहा है और सरकार उनकी जरूरतों की अनदेखी कर रही है। कई श्रमिक संगठनों ने इस मुद्दे को बार-बार उठाया है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
स्थानीय निकायों और राज्य सरकार को इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए। प्रोफेशनल टैक्स के रूप में एकत्र की गई राशि का उपयोग उन क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के सुधार के लिए किया जाना चाहिए जहां ये श्रमिक रहते और काम करते हैं। अच्छी सड़कें, बेहतर जल निकासी, और स्वच्छ पानी की उपलब्धता न केवल श्रमिकों के जीवन को बेहतर बनाएगी, बल्कि औद्योगिक विकास को भी गति देगी। यह समय है कि सरकार श्रमिकों के योगदान का सम्मान करे और उन्हें वह सम्मान दे जिसके वे हकदार हैं। इस समस्या का समाधान करना न केवल एक नैतिक जिम्मेदारी है, बल्कि राज्य के सतत विकास के लिए भी आवश्यक है।

वसई पुर्व वालीव मंडळ के भाजपा कोषाध्यक्ष कपिल सिंह से देश की उपासना समाचार पत्र के ब्यूरो चीफ ने इस मामले पर बात किया तो उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा नवनिर्माण और गढ्ढा मुक्ति के तहत कार्य चल रहा है जल्द ही इस समस्या से निजात मिल जाएगी।

