कंबल से मुंह ढंककर सोते हैं तो रहें अलर्ट: ब्रेन को नहीं मिलती ऑक्सीजन, फेफड़ों को नुकसान, सोते समय मोजे भी न पहनें

ब्यूरो चीफ आर एल पाण्डेय
लखनऊ। डॉ. कल्पना सिंह (संदीप नैचुरोपैथी हॉस्पिटल)
द्वारा बताया गया कि सर्दियों में खुली हवा में सांस लें

सर्दियां शुरू हो चुकी है। ठंड भी धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है।
लोग सुबह-शाम ही नहीं, दिन में भी गर्म कपड़े पहन रहे हैं। कई बार लोग
ठंड से बचने के लिए रात में स्वेटर, सिर में टोपी और पैरों में ऊनी मोजे
लगाकर सो जाते हैं। लेकिन ऐसा करना स्वास्थ्य के लिहाज से ठीक नहीं
है। लंबे समय तक ऐसा करना खतरनाक हो सकता है।

आमतौर पर सोने का ये रूल है मुंह ढंका हुआ नहीं होना चाहिए। ठंड कितनी भी क्यों न पड़े, सिर ढंककर सोने से ब्रेन के काम करने की क्षमता
कम हो जाती है। ब्रेन को कम ऑक्सीजन मिलती है।

1.सिकुड़ने लगते हैं फेफड़े

सिर से लेकर पांव तक ढंककर सोने से फेफड़े पर सबसे ज्यादा बुरा असर पड़ता है। रोज 6 से 8 घंटे महीने भर तक कोई इस तरह सोता है तो उसके फेफड़े सिकुड़ने लगते हैं। यानी फेफड़ों में गैस एक्सचेंज का जो काम होता है वह ठीक से पूरा नहीं होता। इसके गंभीर परिणाम भी हो सकते हैं जैसे-अस्थमा का रोगी बनना, सुस्ती छाना, डिमेंशिया से पीड़ित होना और लगातार सिर दर्द होना।
अगर व्यक्ति पहले से ही अस्थमा का रोगी है या
सांस लेने में परेशानी है तो सिर ढंककर सोना घातक हो सकता है।

2.सफोकेशन से नींद भी हो सकती है डिस्टर्ब

सिर ढंककर सोने से सफोकेशन होने लगती है।
घर में आमतौर पर लोग मच्छरों से बचने के लिए अगरबत्ती या लिक्विड
क्वॉयल जलाते हैं। इसका धुआं पूरे कमरे में फैल जाता है। ठंड के दिनों
में वेंटिलेशन भी प्रॉपर नहीं होता। खिड़कियां बंद रहती हैं। इसलिए कमरे
में वैसे भी शुद्ध हवा नहीं रहती। कंबल या रजाई के अंदर पहले से ही
ऑक्सीजन की कमी होती है ऊपर से कमरे में फैला धुआं। कुल मिलाकर
सफोकेशन होने लगता है। यह स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं होता।

3.स्किन अलर्जी होने लगती है

शुद्ध हवा की कमी होने से डस्ट पार्टिकल्स भी बढ़ जाते हैं। इससे स्किन
पर बैक्टीरिया पर प्रभाव पड़ने लगता है। स्किन पर रैशेज आने लगते हैं।
नियमित रूप से सिर ढंककर सोने से स्किन अलर्जी होने लगती है।

4. मोजो पहनकर भी न सोएं
रात में पैरों को खुला रखना स्वास्थ्य के लिहाज से ज्यादा बेहतर है।
अगर पैरों में ऊनी मोजे पहनते हैं तो शरीर में ब्लड सर्कुलेशन कम हो
सकता है। मोजे की वजह से शरीर का तापमान भी बढ़ जाता है। इससे
पैरों की मांसपेशियों में खिंचाव आने लगता है। 6 से 8 घंटे तक इस तरह
सोने से परेशानी बढ़ जाती है। सोकर उठने के बाद कई लोगों को पैरों में
झनझनाहट या अकड़न होने लगती है। कई बार लोग वही मोजे पहनकर
सोते हैं जो उन्होंने दिन में पहन रखे थे। ऐसे में धूल और मिट्टी भी स्किन
को नुकसान पहुंचाती है। इससे स्किन एलर्जी भी हो सकता है।

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