ब्यूरो चीफ आर एल पाण्डेय
लखनऊ। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने प्रदेश सरकार के बजट में पुरानी पेंशन बहाली की घोषणा न किए जाने सहित कर्मचारी हितों को नजरंदाज किए जाने का आरोप लगाते हुए बजट को कर्मचारी हितों के प्रतिकूल बताया है ।
परिषद के महामंत्री अतुल मिश्रा और प्रमुख उपाध्यक्ष सुनील यादव ने कहा कि कर्मचारियों की मांग थी कि पुरानी पेंशन बहाल की जाए लेकिन बजट में कोई घोषणा नहीं की गई, इसलिए कर्मचारियों के लिए यह बजट आशा के विपरीत रहा है ।
परिषद ने स्थाई रोजगार सृजन की दिशा में कोई योजना ना होने पर भी चिंता व्यक्त की है । परिषद के अनुसार निजीकरण की योजनाएं कभी भी जनहित में नहीं हो सकती इसलिए सरकार को स्थाई रोजगार की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए ।
संविदा प्रथा और ठेकेदारी प्रथा को समाप्त करने के स्थान पर बढ़ावा दिया जा रहा है, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में सभी पदों पर संविदा पर भर्ती की जाती है, स्थाई रोजगार सृजन ना होने से तकनीकी योग्यता धारक लोगों को या तो बेरोजगारी का सामना करना पड़ रहा है या अल्प वेतन और भविष्य की असुरक्षा के बीच कार्य करना पड़ रहा है । संविदा कर्मचारियों को अपने मानदेय बढ़ाने का भी इंतजार था जो पूरा नहीं हुआ ।
जिला और महिला अस्पतालो को मिलाकर बनने वाले मेडिकल कॉलेजों में कर्मचारियों के पदों को समाप्त करने के स्थान पर उन्हें प्रतिनियुक्ति पर रखे जाने की मांग लगातार की जा रही थी और आशा थी कि इस बजट सत्र में इसकी घोषणा की जाएगी जो नहीं हुई ।
पीपीपी मॉडल पर जो मेडिकल कॉलेज बनाए जा रहे हैं उनमें भी स्थाई रोजगार की घोषणा नहीं है अतः कर्मचारी हितों के प्रतिकूल है ।

