कलेजे में फसे 6 सेंटीमीटर के चाकू को डॉक्टर सिद्धार्थ ने ऑपरेशन कर निकाला बाहर : मरीज की बचाई जान : परिजनों में खुशी की लहर

जौनपुर। कलयुग में भगवान का दूसरा रूप के रूप में जाने जाने वाले डॉक्टर यदि अपने पेशे के प्रति ईमानदारी से काम करें तो अससमय मौत के मुंह में जाने वाले लोगों को बचाया जा सकता है। यह कारनामा कर दिखाया है जनपद के सुप्रसिद्ध विख्यात सर्जन डॉक्टर लाल बहादुर सिद्धार्थ जो अक्सर इस तरह के कार्य को लेकर चर्चा में रहते हैं ।बीते छह दिन से एक व्यक्ति के कलेजे में फसे छह सेंटीमीटर का चाकू को प्रख्यात सर्जन डॉ लालबहादुर सिद्धार्थ ने सफल ऑपरेशन करके निकाला । डॉ सिद्धार्थ व उनकी टीम ने करीब डेढ़ घंटे तक ऑपरेशन करके  मरीज की जान बचाने में कामयाब हुई । पिता को  पुनः जीवन दान मिलने के बाद पुत्र समेत पूरे परिवार के लोगो ने राहत की सांस ली। परिवार में खुशी का माहौल है।
केराकत थाना क्षेत्र के  बासबारी गांव के निवासी रामाधीन की बेटी की बीते छह नवम्बर को गोदभराई थी , इस समारोह में डीजे पर डांस करने को लेकर एक युवक से विवाद हो गया जिसके कारण उसे वहाँ भगा दिया गया , उसके बाद वह युवक कुछ दूरी पर जाकर रामधीन के परिवार वालो गालियां देने लगा जिसको लेकर मारपीट होने लगा , झगड़ा छुड़ाने गए इसी गांव मनसा राम को उसने चाकू मार दिया। परिवार वाले  मनसा को पास के एक अस्पताल ले गए लेकिन डाक्टरो ने उसकी हालत नाजुक देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया। घायल के पुत्र ने बताया कि हम लोग जिला अस्पताल लाकर भर्ती कराया लेकिन पांच दिन तक न तो किसी डॉक्टर ने ठीक से इलाज किया न ही जांच और एक्सरे कराया जिसके कारण पिताजी की हालत बिगड़ती जा रही थी, कल शाम को हम लोग वहां से रेफर कराकर नगर के वाजिदपुर तिराहा स्थित डॉ लालबहादुर सिद्धार्थ के अस्पताल ले ।
डॉ सिद्धार्थ ने बताया कि मैंने पहले मरीज का एक्सरे कराया तो हार्ट के नीचे लीवर में चाकू फंसा दिखाई पड़ा और पेट के अंदर खून भरा हुआ था। मैंने तत्काल ऑपरेशन करना चाहता था लेकिन मरीज के परिवार वाले खून की व्यवस्था नही कर पाए। आज ब्लड मिलने के बाद ऑपरेशन किया। करीब डेढ़ घंटे के ऑपरेशन के बाद छह सेंटीमीटर का चाकू निकाला पाया। उन्होंने बताया कि मरीज अब खतरे से बाहर है लेकिन सामान्य स्थिति होने में तीन से चार दिन का समय लगेगा।
पीड़ित के पुत्र ने बताया कि घटना वाले ही दिन हम लोग एफआईआर दर्ज कराने थानागद्दी पुलिस चौकी गए तो वहा से हम लोगों को केराकत कोतवाली भेज दिया गया जब हम लोग कोतवाली गए तो वहां मौजूद सिपाहियों ने कहा कि तुम लोग दारू पीकर आये दिन झगड़ा करते हो भागो यहां से उसके बाद हम पिता की जान बचाने में लगे हुए है।

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