ब्यूरो चीफ/सत्य प्रकाश उपाध्याय
गाजियाबाद : होली पर घर लौटते समय यात्रियों की मुश्किलें बढ़ीं,रंगों के ईस पर्व पर घर जाने की उत्सुकता उस समय निराशा में बदल गई, जब दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख बस टर्मिनलों में से एक कौशांबी बस अड्डे पर यात्रियों को भारी अव्यवस्था, बसों की कमी और भीषण ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ा।
उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपी रोडवेज) द्वारा अतिरिक्त बसों के संचालन का दावा किया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से अलग नजर आई। प्लेटफॉर्म की सीमित संख्या, बसों के असंगठित संचालन और सड़क जाम के कारण हजारों यात्री घंटों तक इंतजार करने को मजबूर रहे।
1611 बसों के संचालन का दावा, फिर भी कम पड़ी व्यवस्थाएं
रोडवेज प्रशासन के अनुसार विभिन्न डिपो से कुल 1611 बसों का संचालन किया गया। इनमें आनंद विहार से 664, कश्मीरी गेट से 133 और सराय काले खां से 55 बसें रवाना की गईं। इसके बावजूद यात्रियों की संख्या के मुकाबले व्यवस्थाएं अपर्याप्त साबित हुईं।
कौशांबी बस अड्डे के भीतर प्लेटफॉर्म पर पैर रखने तक की जगह नहीं बची। वहीं बाहर आनंद विहार और दिल्ली की ओर जाने वाली सड़कों पर बसों और अन्य वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं, जिससे यातायात रेंगता नजर आया।
प्लेटफॉर्म और सूचना तंत्र की कमी बनी बड़ी समस्या
यात्रियों का कहना है कि बसों की उपलब्धता और समय-सारिणी को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही थी। पूछताछ काउंटर पर भी समुचित मार्गदर्शन न मिलने से लोग एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म तक भटकते रहे।
ऑनलाइन और ऑफलाइन समय-सारिणी के बीच तालमेल की कमी ने भ्रम की स्थिति को और बढ़ा दिया। ऑनलाइन टिकट बुक करा चुके यात्रियों को भी अपनी बस खोजने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी
भीड़भाड़ के बीच छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ यात्रा कर रहे यात्रियों को विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बसों में चढ़ने के दौरान धक्का-मुक्की की स्थिति बनी रही। महिला यात्रियों ने सुरक्षा व्यवस्था को अपर्याप्त बताया।
प्रशासन का पक्ष
रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक केएन चौधरी के अनुसार बसों की संख्या पर्याप्त है और ऑनलाइन अनुबंधित बसें भी संचालन में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर जाम की समस्या कम करने का प्रयास किया जा रहा है तथा सभी कर्मचारी मौके पर तैनात हैं।
हालांकि, प्रत्यक्ष स्थिति प्रशासनिक दावों से मेल नहीं खाती दिखी। प्लेटफॉर्म की सीमित क्षमता और बसों के एक साथ पहुंचने से अव्यवस्था की स्थिति बनी रही।
त्योहार की खुशी पर व्यवस्थागत सवाल
होली जैसे बड़े त्योहार पर यात्रियों की भीड़ पूर्वानुमानित होती है। ऐसे में अतिरिक्त बसों की घोषणा के बावजूद यदि जमीनी स्तर पर समन्वय और प्रबंधन प्रभावी न हो, तो त्योहार की खुशी अव्यवस्था की भेंट चढ़ जाती है।
कौशांबी बस अड्डे की स्थिति ने एक बार फिर त्योहारों के दौरान सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की तैयारियों और क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

