गेहूं की फसल में वैज्ञानिक विधि अपनाये डा.अशोक कुमार सिंह

गेहूं की फसल में वैज्ञानिक विधि अपनाये डा.अशोक कुमार सिंह
ब्यूरो चीफ : आलोक कुमार श्रीवास्तव सुलतानपुर :
कृषि वैज्ञानिक केंद्र कठौरा अमेठी में कार्यरत वैज्ञानिक डॉ ए के सिंह ने रबी मौसम में गेहूं की वैज्ञानिक खेती के लिए
जिले के कृषकों को गेहूं बीज वितरण एवं प्रशिक्षण देते हुए बताया कि अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए मुख्य बिंदुओं पर ध्यान देना जरूरी है। कृषि विज्ञान केंद्र कठौरा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ नवनीत कुमार मिश्र ने बताया कि गेहूं के लिए दोमट एवं बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त है। बरसात के बाद गहरी जुताई करें जिससे
खर पतवार और कीट नष्ट हो सकें। उसके बाद 2/3 हल्की जुताई करें और पाटा लगाए जिससे भूमि समतल हो सके। मिट्टी का पी एच 6/7.5 के बीच होना चाहिए। केंद्र के वैज्ञानिक डॉ ए के सिंह पूर्वी उत्तर प्रदेश में बोई जाने वाली उन्नत किस्में जैसे एच डी 2967, एच डी 3086, पी बी डब्लू 343, डी बी डब्लू 187(करन वंदना), डी बी डब्लू 327, डी बी डब्लू 222 एवं डी बी डब्लू 303 किस्मों का चयन करना चाहिए।
यह बीज हमेशा कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केंद्र से ही आधारीय बीज कृषकों को लेना चाहिए। बीज की मात्रा एवं बुवाई का समय सिंचित खेत के लिए 100 से 120 kg प्रति हेक्टेयर असिंचित खेत के लिए 125 से 150 kg प्रति हेक्टेयर बुवाई का समय 10 नवंबर से 25 नवंबर तक बुवाई कर देना चाहिए। बीज डालने की गहराई 4/5 cm
पंक्ति से पंक्ति की दूरी 20/22cm होनी चाहिए।
खाद एवं उर्वरक नाइट्रोजन 120kg , फास्फेट 60kg एवं पोटाश 40kg प्रति हेक्टेयर देना चाहिए।
आधी नाइट्रोजन+पूरी फास्फेट+पोटाश बुवाई के समय दें, शेष आधी नाइट्रोजन दो बराबर भागों में दें। पहली सिंचाई 25 दिन बाद दूसरी सिंचाई 50 दिन बाद शेष मात्रा देनी चाहिए। गेहूं में तीन चार सिंचाई की आवश्यकता होती है।
रोग एवं कीट नियंत्रण पत्ती झुलसा (पत्तियों पर भूरे धब्बे), नियंत्रण के लिए मैंकोजेब 6.2%का छिड़काव , करनाल बंट (बालियों में काले बीज) को ट्राईकोडमी या थीरम 3 gm/kg से उपचारित करना चाहिए।

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