अयोध्या।(डा.अजय तिवारी जिला संवाददाता) जिले के विकासखंड मया बाजार ग्राम पंचायत मया भीखी मे तथाकथित ग्राम प्रधान करूणेश प्रताप सिंह व तथाकथित ग्राम विकास अधिकारी ( सचिव ) अमन आचार्य तथा तथाकथित रोजगार सेवक सुरेश विश्वकर्मा की मिली साठगांठ से ग्राम पंचायत निधि राज्य वित्त/ 14वां वित्त / 15 वा वित्त/ राष्ट्रीय महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना से लाखों रुपए की गमन भ्रष्टाचार लीगल नोटिस सूत्र के मुताबिक अधिवक्ता सुनील द्विवेदी के द्वारा गीता गौड पत्नी चेतराम गौड़ ग्राम मयाभीखी ने खंड विकास अधिकारी विकास खंड मया-बाजार जनपद-अयोध्या को पंजीकृत डाक से भेजा गया है।5 व्यक्तियों के खाते में 23 मानव दिवस की हाजिरी लगाकर भुगतान कर धन का बंदरबांट स्वयं को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य जानबूझकर किया गया है। यह भी आरोप लगाया है की रामलीला समिति द्वारा 1 मीटर के चौड़े – लंबे तथा गहरे 7 से 8 गड्ढे खुदाई कराई गई थी । जिसको भरने के लिए 26 मजदूरों ने सात दिवस और 14 मजदूरों ने सात दिवस तक पटाई का कार्य किया गया और रामलीला मे उगे हुए घास को साफ किया गया है।142 मानव दिवस की हाजरी दिनाक 8-7-2021 से 14-7-2021 मे लगा कर भुगतान किया गया उपरोक्त कार्य स्थल पर ही 94 मानव दिवस की हाजिरी दिनाक 15-7-2021 से 21-7-2021 तक कुल 236 मानव दिवस लगाकर भुगतान कर बंदरबांट किया गया है। कागजों में इतिश्री कर स्वयं को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। नाम प्रकाशित न करने पर टीए ने जानकारी दी कि तीन गड्ढे की पटाई के लिए एक मजदूर की आवश्यकता है।वही इंटरलॉकिंग कार्य के नाम पर झोले में संचालित फर्म के नाम भुगतान किया गया है । जिनका जमीन पर कोई अस्तित्व ही नहीं है।
नोटिस में यह भी सवाल किया गया है की ग्राम प्रधान कान्ती ने अपने मानदेय का भुगतान 24/8/2021 को 7000 रुपया किया गया है। लेकिन सार्वजनिक शौचालय पर कार्यरत कर्मचारी के भुगतान के लिए बंदना स्वयं सहायता समूह के बैंक खाते में 27000 अभी तक भुगतान क्यों नहीं गया है।विकासखंड मया में पंचायत विभाग से लेकर सभी कर्मचारी और दस्तावेज से यह प्रतीत होता है कि करूणेश प्रताप सिंह वास्तविक ग्राम प्रधान व अमन आचार्य वास्तविक ग्राम विकास अधिकारी जबकि वर्तमान ग्राम प्रधान कांति व ग्राम विकास अधिकारी (सचिव) विनोद आचार्य हैं। लेकिन चेकर और मेकर का कार्य यह दोनों नहीं करते हैं। तथाकथित ग्राम प्रधान व सचिव द्वारा किया जाता है। क्योंकि यह पूरा प्रकरण गमन, भ्रष्टाचार , सरकारी धन ,अपने पद कर्तव्यो के दायित्व के दुरुपयोग का प्रकरण है। जो एक जांच का विषय है। उपरोक्त मास्टर रोल नंबर और आईडी नंबर द्वारा जो भी कार्य कराए गए हैं। उन सभी के बिल-वाउचर, एमबी, मास्टर रोल, तकनीकी स्वीकृति की छाया प्रति मागी गई है।जिसका जवाब प्रार्थीनी व प्रार्थीनी के अधिवक्ता को 15 दिनों के अंदर देने की बात कही गई है।

