जीयनपुर नगर में एक व्यापार मंडल संगठन के दो अध्यक्ष बने असली कौन नकली कौन?

जीयनपुर नगर में एक व्यापार मंडल संगठन के दो अध्यक्ष बने असली कौन नकली कौन?

रिपोर्ट *नीतीश जायसवाल आज़मगढ़*

सगड़ी आजमगढ़

वर्तमान समय में जीयनपुर नगर के सभी व्यापार मंडल कमेटियों निष्क्रिय हो चुकी है जिससे सम्मानित व्यापारी जनों का उत्पीड़न की आवाज तथा उनकी समस्याओं का सही निदान नहीं हो पा रहा है इससे व्यापारी वर्ग में गहरा क्षोभ फैल गया है
जीयनपुर का व्यापार मंडल एक खिलवाड़ तथा हंसी का पात्र बन गया है यहां पर बनवारी लाल कंछल गुट से अशोक सिंह पूर्व ग्राम प्रधान अध्यक्ष पद पर यासीन है तथा वहीं दूसरी तरफ स्वर्गीय श्याम बिहारी मिश्र गुट से दो अध्यक्ष मनीष चौरसिया तथा शशि प्रकाश गुप्ता अपने अध्यक्ष पद का दावेदार बन रहे हैं अब इस मिश्र गुटके व्यापार मंडल में असली अध्यक्ष का दावेदार कौन है जो इसे इस मंडल के जिला पदाधिकारी ही बता सकते हैं कि असली और नकली कौन है क्योंकि एक संगठन से 2 2 अध्यक्ष एक नगर में बन जाने से जीयनपुर नगर का व्यापार मंडल हंसी का पात्र बन गया है जिससे इन व्यापार मंडल पदाधिकारियों की तमाशा से व्यापारी समाज का विश्वास समाप्त होता जा रहा है
स्व0 श्याम बिहारी मिश्र गुट के नगर अध्यक्ष मनीष चौरसिया का कहना यह है कि हमारी कमेटी को जिला कमेटी ने मान्यता देकर नगर अध्यक्ष बनाया है जबकि इसके विपरीत में इसी संगठन के नगर संरक्षक संतोष कुमार उर्फ बबलू जायसवाल ने जिला पदाधिकारियों के आदेश से नगर में एक अध्यक्ष महामंत्री तथा कोषाध्यक्ष को मनोनयन करके जिला तथा प्रदेश कमेटी को सूचित करके मनीष चौरसिया कमेटी को अवैध घोषित कर दिया है जो इसकी वास्तविकता क्या है यह तो जिला कमेटी या प्रदेश पदाधिकारी ही इसका खुलासा कर सकते है यह सच है कि जिसे कोई गलत भी नहीं कह सकता है कि मनीष चौरसिया का चुनाव नगर के संपूर्ण व्यापारिक समूह के बीच नहीं हुई थी जो थाना कोतवाली में एक पीस कमेटी की बैठक में चंद व्यापारी तथा इनके गैर व्यापारी ने अध्यक्ष बना दिया था जिसके विरोध में नगर के व्यापारियों ने इसका जमकर विरोध किया जिसके तत्पश्चात व्यापारियों की मांग पर माननीय बनवारी लाल कंछल गुट व्यापार मंडल का एम एन लाल पब्लिक स्कूल परिसर में व्यापारियों के बीच एक नया चुनाव कराया गया जिसमें अशोक सिंह पूर्व ग्राम प्रधान अध्यक्ष मुन्ना यादव महामंत्री तथा सलीम अहमद कोषाध्यक्ष बने परंतु इन कमेटियों के बन जाने से कुछ दिनों के बाद नगर के सभी व्यापार मंडल कमेटियों में इतनी निष्क्रियता आने लगी कि व्यापारियों की उत्पीड़न तथा उनकी आवाज को उठाने वाला कोई नहीं मिला जिससे व्यापारी समाज इन व्यापारी नेताओं से एक उम्मीद की विश्वास समाप्त करके अपना फैसला स्वयं लेते हुए यह आवाज उठा रही है कि जब किसी व्यापारी संगठन में गैर व्यापारी समुदाय के लोग जो किसी भी प्रकार का व्यापार नहीं करते हैं अगर उनकी ही इसमें भागीदारी बन जाएगी तो वह संगठन व्यापारी संगठन नहीं उसे कुछ और ही कहा जाएगा इसीलिए व्यापारी नेताओं की यह दायित्व बनता है कि वह अपनी तथा व्यापार मंडल की सम्मान को बचाते हुए अपने किसी भी व्यापार मंडल की कार्यक्रम में गैर व्यापारी या राजनीतिक दल नेताओं को उसमें सम्मिलित करके अपने को कमजोर बनते हुए हंसी का पात्र ना बने

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