ब्यूरो चीफ आर एल पाण्डेय
लखनऊ। जब फेफड़ों के टिशूज में सूजन होने से जो विकृति उत्पन्न होती है उसे न्यूमोनिया कहते हैं बैक्टीरिया के द्वारा फेफड़ों के वायु मार्ग व सुषमा सूक्ष्म प्रणालियों में उनसे सम्बन्धित वायुकोष्ठो में उत्पन्न सूजन से वायु मार्ग अधिक सकरा हो जाता है और इस से पीड़ित रोगी को सांस लेने में कष्ट होता है
यह एक प्रकार की फेफड़ों की सूजन है जिसमे न्यूकोकोक्कई बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण फेफड़ों के एक अथवा अधिक भागों में एक जैसा solidefication हो जाता है
लगभग 95% रोगियों में स्ट्रैप्टॉकोक्कस न्यूमोनाई इसका मूल कारण होता है न्यूमोनाई एच इनफ्लुएंजा एवं अन्य छोटे जीवाणु अनेक जीवाणु शरीर की इम्यूनिटी कम होते ही फेफड़ों में जाकर इस रोग को उत्पन्न कर देते हैं वायरस हानिकारक गैस अत्यधिक थकान भी इस रोग को फैलाते हैं वातावरण में सर्दी गर्मी के परिवर्तन में यह रोग जल्दी होता है ये रोग शीत ऋतु के प्रारंभ में अधिकता से होता है यह रोग पुरुषों में महिलाओं की अपेक्षा अधिक होता है ऐसे व्यक्तियों शारीरिक प्रतिरोधक शक्ति किसी अन्य रोग के कारण पहले से ही कम हो ऐसे रोगी को अपनी चपेट में जल्दी लेता है।
लक्षण_रोग का हमला अचानक होता है रोगी को सर्दी लगती है तथा कभी-कभी जी मिचला कर उल्टी भी हो सकती है मात्र कुछ ही घंटों में तापमान बढ़कर 39 से 40 सेंटीग्रेड तक हो जाता है रोगी को थकान सिरदर्द पूरे शरीर में दर्द व टूटन अनुभव होती है तथा भूख नष्ट हो जाती है रोगी की सांस तेज हो जाती है तथा त्वचा लाल एवं शुष्क लगती है रोगी की छाती में दर्द होता है जो खासने पर बढ़ जाता है कहने का तात्पर्य है कि रोगी को बार-बार खासने से छाती का दर्द बढ़ता रहता है बलगम बहुत ही कम मात्रा में तथा चिपचिपा निकलता है बलगम कभी-कभी रक्तयुक्त भी निकलता है बच्चों में एक खांसते खांसते ही वमन हो जाती है रोगी की पसलियां अंदर की ओर घुसी हुई लगती है
उपाय _ 1 पीपला मूल 60 मिलीग्राम शहद के साथ बच्चों को चटाने से न्यूमोनिया एवं फेफड़ों से संबंधित अन्य सभी रोग कब निकालकर ठीक हो जाते हैं
2 गोदंती भस्म और लक्ष्मी विलास रस 125 _125 मिलीग्राम एक मात्रा ऐसी 1_1 मात्रा दिन में तीन बार शहद के साथ सेवन कराना लाभकारी है ।
मीठे बदाम का तेल न्यूमोनिया में लाभदायक होता है।
नमक की पोटली को छाती के आगे पीछे और बगल में सेक करने से न्यूमोनिया में लाभ होता है।

