ताज के 500 मीटर दायरे में सर्वे हुआ शुरू, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एडीए ने कराई पैमाइश

ताजमहल से 500 मीटर का प्रतिबंधित क्षेत्र मापने के लिए विकास प्राधिकरण की दो टीमें बृहस्पतिवार को ताजगंज पहुंची। सड़कों पर फीते डाले गए। मशीनों की मदद से सर्वे किया। क्षेत्र बड़ा होने के कारण शुक्रवार से चार टीमें सीमा निर्धारण व चिह्नांकन करेंगी। प्रतिबंधित दायरे में हो रही सभी व्यावसायिक गतिविधियां बंद होंगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर विकास प्राधिकरण ने ताजमहल के 500 मीटर के दायरे में व्यावसायिक गतिविधियां रोकने के लिए सर्वे शुरू कर दिया है। इसमें राजस्व विभाग की मदद ली जा रही है। ताकि भविष्य में दोबारा चिह्नांकन की जरूरत न पड़े। विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष चर्चित गौड़ ने बताया कि बृहस्पतिवार को दो टीमों ने सीमा निर्धारण किया है। दक्षिणी गेट, पूर्वी गेट और पश्चिमी गेट से 500 मीटर का दायरा बड़ा है। बड़ा क्षेत्र होने के कारण टीमें और बढ़ाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि सर्वे के बाद नोटिस जारी किए जाएंगे। फिर चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंधित परिधि से सभी व्यावसायिक गतिविधियों को बाहर किया जाएगा। 500 मीटर के दायरे में कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं होगी। दोपहर में एडीए उपाध्यक्ष ने टीम के साथ ताजमहल के आस-पास क्षेत्रों का दौरा किया है।

एएसआई के पास नहीं सर्वे का रिकॉर्ड

सन 2000 में सुप्रीम कोर्ट ने 500 मीटर का दायरा तय किया था। तब 71 दुकानदारों को पश्चिमी गेट से हटाया गया था। 22 साल पहले हुए सर्वे का रिकॉर्ड भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) से एडीए ने मांगा था। बृहस्पतिवार को एएसआई ने एडीए को भेजे जवाब में कहा कि उनके पास सर्वे का कोई रिकॉर्ड नहीं है। एएसआई ने ऐसा कोई सर्वे नहीं कराया है।प्रतिबंधित परिधि में दुकानें चला रहें लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल बृहस्पतिवार को विकास प्राधिकरण के कार्यालय पहुंचा। जिनमें दक्षिणी गेट व पूर्वी गेट के व्यापारी शामिल थे।एडीए द्वारा की जा रही कार्रवाई पर आपत्ति जताई। एडीए उपाध्यक्ष से मुलाकात नहीं हो सकी।वहीं, पश्चिमी गेट एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं याचिकाकर्ता अमर सिंह राठौर का कहना है कि उन्होंने सिर्फ अपने हक की लड़ाई लड़ी है। उनका उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं है। कोई भी नियम सभी के लिए समान रूप से लागू होना चाहिए।बता दें ताज के प्रतिबंधित क्षेत्र में 400 से अधिक होटल, दुकान व एंपोरियम हैं। वर्ष 2000 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया था। इस क्षेत्र में वाहनों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध है। परिवहन विभाग की ओर से नए पास जारी करने पर रोक लगा दी गई है। विशेष पास के जरिये ही यहां लोग निजी वाहन से आवाजाही कर सकते हैं।

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