आर एल पाण्डेय
लखनऊ। दिसंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कानपुर मेट्रो का शुभारंभ करेंगे। वर्तमान में आईआईटी से मोतीझील के बीच 9 किलोमीटर लंबे प्राथमिक सेक्शन पर मेट्रो चलेगी। कानपुर मेट्रो के प्राथमिक सेक्शन को पर्यावरण प्रबंधन के लिए आईएसओ 14001 एवं संरक्षा प्रबंधन के लिए आईएसओ 45001 प्रमाण पत्र मिल चुके हैं। आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के साथ कानपुर मेट्रो की ट्रेनें पूरी तरह से मेक इन इंडिया है और इन्हें गुजरात में बड़ोदरा के निकट स्थित सांवली में बने प्लांट में तैयार किया जा रहा है। ईट्रेन रीजेनरेटिव ब्रेकिंग तकनीक से ऊर्जा संरक्षण की दक्षता के साथ-साथ वायु प्रदूषण को कम करने के लिए अत्याधुनिक प्रापल्शन सिस्टम से भी लैस है। इन ट्रेनों में कार्बन डाइऑक्साइड सेंसर आधारित एयर कंडीशनिंग सिस्टम होगा जिससे ऊर्जा की बचत होगी। ऑटोमेटिक ट्रेन ऑपरेशन को ध्यान में रखते हुए ये ट्रेनें संचार आधारित ट्रेन नियंत्रण प्रणाली से चलेंगी। कानपुर मेट्रो की ट्रेनों की यात्री क्षमता लगभग 974 यात्रियों की होगी। इन ट्रेनों की डिजाइन स्पीड 90 किलोमीटर प्रति घंटा और ऑपरेशन स्पीड 80 किलोमीटर प्रति घंटा तक होगी। कानपुर की मेट्रो ट्रेनें थर्ड रेल यानी पटरियों के समानांतर चलने वाली तीसरी रेल से ऊर्जा प्राप्त करेंगी, इसलिए इसमें खंभों और तारों के सेटअप की आवश्यकता नहीं होगी और बुनियादी ढांचा बेहतर और सुंदर दिखाई देगा। कानपुर के प्राथमिक सेक्शन के लिए 8 मेट्रो ट्रेनें और कानपुर के दोनों कॉरिडोर को मिलाकर कुल 39 देने आएंगी जिनमें से प्रत्येक में 3-3 कोच होंगे। कानपुर मेट्रो देश की पहली ऐसी मेट्रो परियोजना है, जहां पर उपरिगामी (एलिवेटेड) मेट्रो स्टेशनों के कानकोर्स के निर्माण हेतु डबल टी -गार्डर्स का उपयोग किया गया। इस नवोन्मेष की सहायता से प्राथमिक शिक्षण के सभी नौ मेट्रो स्टेशनों के कानकोर्स सिर्फ 7 महीने और 17 दिन के रिकॉर्ड समय में बनकर तैयार हो गए। देश में पहली बार कानपुर मेट्रो परियोजना में पोर्टल के स्थान पर ट्विन पियर कैप का नवाचार किया गया जिससे डिपो के एग्जिट/ इंट्री एवं ऑटोमेटिक कोच वॉश प्लांट को आधार देने में सहायता मिली, जिसकी मदद से सड़क पर वाहनों की सुचारू आवाजाही के लिए जगह की बचत हुई और मेट्रो के सिविल ढांचे की सुंदरता में भी वृद्धि हुई।

