दो कंपनियों की साठगांठ से कराई गईं संविदा कर्मियों की नियुक्ति, प्रो. पाठक के मामले में खुलासा

छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के कुलपति प्रो. विनय पाठक के मामले में एसटीएफ के हाथ कई अहम सुबूत लगे हैं। एसटीएफ की जांच में कमीशनखोरी के साथ प्रो. पाठक के विभिन्न संस्थानों में तैनाती के दौरान हुए निर्माण कार्य, परीक्षा व नियुक्तियों को शामिल कर लिया गया है। इसी क्रम में संविदाकर्मियों की नियुक्ति के मामले में दो कंपनियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। इन कंपनियों ने पांच विश्वविद्यायलों में संविदाकर्मियों की नियुक्ति कराई थी। इस धांधली में साक्ष्य हाथ लगते ही एसटीएफ की दो टीमें एकेटीयू और छत्रपति शाहूजी महाराज विवि पहुंचीं। जांच एजेंसी ने इन संस्थानों के करीब 11 कर्मचारियों से पूछताछ की है। यह पूछताछ शनिवार देर शाम हुई। एसटीएफ के एक अधिकारी के मुताबिक पूछताछ में नियुक्तियों के खेल के अलावा कई अन्य मामलों की भी जानकारी हाथ लगी है। आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि से भी ऐसे साक्ष्य हाथ लगे हैं। बताया जा रहा है कि फर्जीवाड़ा कर नौकरी करने वालों पर एसटीएफ की नजर है। यह भी पता चला है कि प्रो. पाठक के एकेटीयू के कार्यकाल के दौरान कुछ ऐसे लोगों की भर्ती भी की गई, जिनके प्रमाण पत्र सही नहीं थे। अयोग्य लोगों को असिस्टेंट प्रोफेसर, असिस्टेंट रजिस्ट्रार और सर्विस प्रोवाइडर की नौकरी दे दी गई। इन सभी की सूची तैयार कर ली गई है। इनसे सोमवार को पूछताछ की जा सकती है।

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