नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान, लखनऊ में धूमधाम से विश्व गौरैया दिवस मनाया गया

नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान, लखनऊ में धूमधाम से विश्व गौरैया दिवस मनाया गया

ब्यूरो चीफ आर एल पाण्डेय

लखनऊ। नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान, लखनऊ में धूमधाम से विश्व गौरैया दिवस मनाया गया। प्राणि उद्यान स्थित सारस प्रेक्षागृह में गौरैया दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर कार्यशाला में दिनेश बडोला, क्षेत्रीय वनाधिकारी, प्राणि उद्यान, लखनऊ, अमिता कनौजिया, प्रोफेसर, जन्तु विज्ञान विभाग, लखनऊ विश्वविद्यलय, लखनऊ, प्रशान्त त्रिपाठी, बायलॉजिस्ट, प्राणि उद्यान, लखनऊ, के साथ एमिकस एकेडमी, के० के०वी० डिग्री कॉलेज, एस०के०डी० डिग्री कॉलेज एवं लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ की छात्र/छात्राऐं उपस्थित रहीं।

विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर प्राणि उद्यान में भ्रमण करने आने वाले दर्शकों को जागरूक करने हेतु स्टॉल लगाकर गौरैया संरक्षण हेतु आवश्यक जानकारी अमिता कनौजिया, प्रोफेसर, जन्तु विज्ञान विभाग, लखनऊ विश्वविद्यलय, लखनऊ द्वारा प्रदान की गयी।

इस अवसर पर गौरैया संरक्षण हेतु घोंसले, मिट्टी के बर्तन, उनके आवास हेतु उपयुक्त पौधे एवं दाना निःशुल्क वितरण किया गया, तत्पश्चात गौरैया संरक्षण पर प्राणि उद्यान स्थित सारस प्रेक्षागृह में कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें घरेलू सामग्री से घोंसला बनाना सिखाया गया।

इस अवसर पर अमिता कनौजिया, प्रोफेसर, जन्तु विज्ञान विभाग, लखनऊ विश्वविद्यलय, लखनऊ ने कार्यशाला में उपस्थित विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों को गौरैया दिवस के शुभकामनाएं देते हुए कहा कि गौरैया को संरक्षित करने के अधिक आवश्यकता है, उसका कारण है कि गौरैया हमारे शुद्ध वातावरण का द्योतक है। यदि हमारे आस-पास गौरैया रहती है तो इसका सीधा मतलब है कि हम शुद्ध वातावरण में रह रहे हैं। गौरैया को किसान मित्र भी कहा जाता है क्योंकि जो कीड़े हमारी फसल को नुकसान पहुँचाते हैं यह उन्हें खाकर हमारी फसलों की रक्षा करती है। यदि हमें गौरैया को बचाना है तो हमें अपने घरों में उनके रहने हेतु स्थान तथा मिट्टी के पात्रों में दाना एवं पानी की व्यवस्था करनी होगी। उन्होंने कहा कि हम सभी को अपने दृष्टिकोण में बदलाव लाने की आवश्यकता है।

कुछ वर्षों पहले तक हमारे घर-घर में, गाँवों तथा छतों में बड़ी संख्या में गौरैया दिखायी देती थी। सुबह से ही चिड़ियों का चहकना शुरू हो जाता था परन्तु विगत कुछ वर्षों में गौरैया की संख्या में काफी कमी आई है। इसका मुख्य कारण शहरीकरण लाइफ, कल्चर तथा लोगो की जीवनशैली में बदलाव है। जहाँ पहले घरों में रौशनदान, अटारी, टीन की छतें आदि बनाई जाती थी जिनमें गौरैया अपना घोंसला बनाती थी, परन्तु जीवनशैली में बदलाव के कारण यह प्रजाति विलुप्त होती जा रही है तथा शहरों के बाहर खुले स्थल, बाग-बगीचों का कम होना एवं बढ़ती आबादी, शहरीकरण तथा वाहन प्रदूषण के कारण गौरैया की संख्या में कमी होती जा रही है।

पक्षियों को सबसे अधिक नुकसान मोबाइल टावरों से निकलने वाले रेडिएशन से होता है, जिसकी वजह से पक्षियों की मृत्यु होने की दर बढ़ रही है। उन्होंने अपील की कि सभी व्यक्तियों को कम से कम एक घोसला अपने घरों में गौरैया संरक्षण हेतु लगाना चाहिए तथा ग्रीष्म ऋतु में छतों पर दाना एवं पानी अवश्य रखना चाहिए।

कार्यक्रम का संचालन प्रशान्त त्रिपाठी, बायलॉजिस्ट, प्राणि उद्यान लखनऊ द्वारा किया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *