निरंतर चलने वाली प्रक्रिया हैं अनुसंधानः कुलपति

ब्यूरो प्रमुख विश्व प्रकाश श्रीवास्तव
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में सोमवार को पीएच.डी. कोर्स वर्क- 2023 उद्घाटन प्रोग्राम का आयोजन किया गया।
बतौर अध्यक्ष विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. निर्मला एस. मौर्य ने शोध और अनुसंधान के मौलिक अंतर को समझाया। उन्होंने अपनी बात कबीरदास के दोहे से शुरुआत करते हुए कहा कि जिन खोजा तिन पाइया गहरे पानी पैठ, मैं बपुरा बूडन डरा, रहा किनारे बैठ। अनुसंधान में भी यही चीज लागू होती है। शोध एक दो सप्ताह की नहीं बल्कि निरंतर स्टेप बाई स्टेप चलने वाली प्रक्रिया है। इसमें परिकल्पना के सहारे समस्या का समाधान ढूंढा जाता है। उन्होंने शोध में जरूरी चीजों के साथ शोध प्रविधि के बारे में सुव्यवस्थित ढंग से विस्तार से समझाया।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता प्रो. वंदना राय ने कहा कि रिसर्च एक सतत प्रक्रिया है। शोधार्थी को इसे ईमानदारी, पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ करना चाहिए। कहा कि शोधार्थी से कच्चा (रॉ) डेटा हमेशा रखना चाहिए। अक्सर प्रकाशक उसकी मांग करते हैं। उन्होंने रिसर्च के एथिक्स को समझाते हुए रिसर्च पेपर में साहित्यिक चोरी पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। उन्होंने गेस्ट, घोस्ट और गिफ्ट आथरशिप पर उदाहरण के साथ अपनी बात रखी।
कुलसचिव महेंद्र कुमार ने कहा कि रिसर्च समाजपयोगी होना चाहिए। तभी समाज का भला और देश को मजबूती मिलेगी। उन्होंने नई शिक्षा नीति को कोड करते हुए कहा कि स्थानीय चीजों पर भी शोध होना चाहिए।
वित्त अधिकारी संजय कुमार राय ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत विश्वविद्यालय के साथ-साथ महाविद्यालयों में पीएच.डी. केंद्र स्थापित किये जायेंगे। शोध विश्वविद्यालय की रीढ़ होता है। यही से विश्वविद्यालय के पहचान का रास्ता खुलता है। कार्यक्रम का संचालन प्रोग्राम समन्वयक प्रो. मुराद अली एवं धन्यवाद ज्ञापन समरीन ने किया। इस कार्यक्रम की रूपरेखा कुलपति के निर्देशन में सहायक कुलसचिव शैक्षणिक बबिता सिंह ने टीम के साथ तैयार की। इस अवसर पर प्रो. अविनाश पाथर्डीकर, प्रो. अजय द्विवेदी, प्रो. बीडी शर्मा, प्रो. देवराज सिंह, प्रो. मिथिलेश सिंह, प्रो. रजनीश भास्कर, डा. राजकुमार, डा. प्रमोद कुमार यादवा, डा. मनीष गुप्ता, डॉ मनोज मिश्र, डॉ रसिकेश, डा. प्रमोद कुमार, डॉ सुनील कुमार, डॉ दिग्विजय सिंह राठौर, डा. नितेश जायसवाल, डॉ विनय वर्मा, सहायक कुलसचिव अमृतलाल, नंदकिशोर सिंह, रमेश यादव आदि मौजूद रहे।

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