-पुलिस प्रशासन की नाक के नीचे नाबालिग चला रहे ई-रिक्शा-
-पुलिस की नाक के नीचे 12 से 14 साल के नाबालिग चला रहे ई-रिक्शा-
ब्यूरो चीफ आर एल पाण्डेय
लखनऊ। नाबालिग ई-रिक्शा चालक आधार को ही मानते है अपना लाइसेन्स- लखनऊ ! राजधानी में फर्राटा भर रहे तमाम ई-रिक्शा चालकों में 12 से 14 साल के नाबालिग ई-रिक्शा चालक भी है जो फर्राटा भरते हुए आसानी से नज़र आ जाते है जो सवारियों की जान के साथ खिलवाड़ भी कर रहे है।
केवल चारबाग क्षेत्र की बात करे तो नत्था तिराहा, पानदरीबा नाका दुंगावा पाण्डेयगंज रकाबगंज वजीरगंज मेडिकल कालेज पुसिस चौकियों के पास से पुलिस के सामने ही ये नाबालिक बच्चे सवारियाँ भरते हैं। इन नाबालिगों को आधार और लाइसेंस में क्या फर्क है इसका उन्हें ज्ञान नही है। कापी पेंसिल पकड़ने की उम्र में ये ई-रिक्शा चला रहे है।
चारबाग़ क्षेत्र में एक नाबालिग ई-रिक्शा चालक से जब हमारे संवाददाता ने लाइसेंस मांगा तो उसने बिना सोचे समझे तपाक से अपनी जेब मे हाथ डालकर अपना आधार निकाल कर दे दिया और कहा कि
ये लो , जब उससे पूछा गया ये तो आधार है तो उसने कहा मुझे नही मालूम लाइसेंस क्या होता है।
समाज में अशिक्षित नाबालिग वर्ग यह नही समझता कि आखिर लाइसेंस भी कोई चीज़ है ! आखिर शहर भर में बिना लाइसेंस फर्राटा भर रहे नाबालिग ई-रिक्शा चालकों के खिलाफ पुलिस प्रशासन कब अपनी जिम्मेदारी को समझेगा। कब कोई कार्यवाही करेगा? जब कोई बडी़ दुर्घटना घटित हो जायेगी तब ज़िम्मेदार अफसर जागेगें।
दोषी समाज और सरकार भी है।जिस उम्र में इन बच्चो के हाथ मे पेंसिल और किताब होनी चाहिए इस नासमझ उम्र में नाबालिगों के हाथ मे रिक्शे का हैंडल पकडा़ दिया गया है ! बच्चो में शिक्षा की अलख जगाने की राज्य सरकार की मुहिम आखिर कब रंग लाएगी ! या फिर फाइलों में ही आदेश सिमट कर रह जाएंगे ! स्कूल चलो अभियान, शिक्षार्थ आइये सेवार्थ जाइये जैसे स्लोगन सिर्फ दीवारों पर अच्छे लगते जबकि वास्तविकता तो कुछ और ही है।

