बाल कलाकारों से पांच घंटे से ज्यादा काम लेने पर रोक, इन आठ बिंदुओं मे समझिए नए सरकारी नियम

राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग ने गुरुवार को नाबालिग कलाकारों को लेकर कुछ जरूरी दिशा निर्देश जारी किए हैं। एनसीपीसीआर ने अपने नए दिशानिर्देशों के अनुसार प्रोडक्शन हाउस के लिए सभी बाल कलाकारों को जिला मजिस्ट्रेट के तहत पंजीकृत करना अनिवार्य कर दिया है। आयोग ने मनोरंजन उद्योग में काम करने वाले बच्चों के साथ माता-पिता का हर समय उपस्थित रहना भी अनिवार्य कर दिया है।

बाल कलाकारों का पंजीकरण
बाल कलाकारों के लिए पंजीकरण एक बार में केवल छह महीने के लिए वैध होता है। एनसीपीसीआर ने अपने नए दिशा-निर्देशों में कहा, “किसी भी ऑडियो-विजुअल मीडिया प्रोडक्शन या किसी बच्चे की भागीदारी वाले किसी व्यावसायिक कार्यक्रम के निर्माता को जिलाधिकारी से अनुमति प्राप्त करने के बाद ही बच्चे को भागीदारी में शामिल करना होगा।”

बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी
आयोग ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बाल कलाकारों के पंजीकरण के लिए प्रोडक्शन हाउसों के लिए एक ऑनलाइन तंत्र तैयार करने का भी निर्देश दिया। प्रोडक्शन हाउस को एक डिस्क्लेमर भी रखना होता है, जिसमें लिखा होता है, “शूटिंग की पूरी प्रक्रिया के दौरान ऐसे बच्चे के साथ कोई दुर्व्यवहार, उपेक्षा या शोषण नहीं हुआ है, यह सुनिश्चित करने के लिए सभी उपाय किए गए थे”। आयोग ने निर्देश दिया है कि प्रोडक्शन से जुड़ा हर वह व्यक्ति, जो बच्चों या किशोरों के संपर्क में हो सकता है, बच्चों के साथ शूटिंग करने से पहले मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट जमा करेगा। प्रोडक्शन हाउस के लिए भी निर्देश जारी किया गया है कि ऐसे कर्मचारियों को नियोजित करने से पहले उनका पुलिस सत्यापन करवाना होगा।

पांच घंटे ही काम कर सकते हैं बच्चे
एनसीपीसीआर के दिशा निर्देश बच्चे के लिए सुरक्षित कामकाजी माहौल बनाने की भी बात करते हैं। इसमें कहा गया है कि बच्चों को विशेष रूप से विपरीत लिंग के वयस्कों के साथ ड्रेसिंग स्पेस या कमरे साझा करने के लिए नहीं बनाया जाना चाहिए। आयोग ने यह भी कहा कि किसी भी बच्चे को एक दिन में पांच घंटे से अधिक और बिना आराम के तीन घंटे से अधिक काम नहीं करने दिया जाएगा। बच्चों से ओवरटाइम भी नहीं कराया जा सकता है। दिशा-निर्देशों के अनुसार, माता-पिता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी मंच पर किसी भी कार्य में बच्चों की भागीदारी से उनकी स्कूली शिक्षा प्रभावित न हो।

अश्लीलता वाले विषय से दूर रहेंगे बच्चे
आयोग ने कहा है कि किसी भी बच्चे को ऐसी स्थिति में नहीं रखा जाए जो बच्चे के लिए अनुपयुक्त है या जो उसे परेशान कर सकता है या उसे शर्मनाक स्थितियों में डाल सकता है। किसी भी बच्चे को अभद्र, अश्लील या नग्नता वाले विषय में शामिल नहीं होने दिया जा सकता और कोई भी व्यक्ति किसी बच्चे को अपने शरीर का प्रदर्शन नहीं करने देगा। यह भी कहा गया है कि किसी भी बच्चे या किशोर को ऐसे किसी भी विषय में काम करने के लिए नहीं कहा जाएगा, जो उनके द्वारा नहीं देखा जा सकता है। दिशानिर्देशों में कहा गया है कि आर्थिक लाभ के लिए बच्चे या उनके परिवार द्वारा बनाई गई सोशल मीडिया सामग्री को बाल श्रम और किशोर श्रम अधिनियम, 1986 के अनुसार पारिवारिक उद्यम में काम करने वाले बच्चों के रूप में माना जाएगा।

मीडिया हाउस के लिए निर्देश
यह भी कहा गया है कि बच्चे की कमाई का 20 प्रतिशत हिस्सा बच्चे के नाम पर एक एक राष्ट्रीयकृत बैंक में जमा फिक्स डिपॉजिट में जमा किया जाएगा। साथ ही मीडिया हाउस के लिए भी दिशा निर्देश जारी किए गए हैं कि यदि कोई बच्चा हिंसा या दुर्व्यवहार का शिकार हुआ है तो बच्चों से संबंधित मुद्दों या कहानियों को सनसनीखेज खबर बनाने से बचना है।

आइए इन बिंदुओं से समझते हैं राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग के दिशा निर्देश

  • किसी बच्चे के ऑडियो-विजुअल मीडिया प्रोडक्शन या किसी व्यावसायिक कार्यक्रम में भाग लेने से पहले निर्माता को संबंधित जिला मजिस्ट्रेट से अनुमति लेनी होगी।
  • निर्माता यह सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा के लिए उपयुक्त सुविधाओं की व्यवस्था करेगा, जिससे बच्चे की स्कूली पढ़ाई में कोई समस्या उत्पन्न न हो, और किसी भी बच्चे को लगातार 27 दिनों से अधिक काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
  • बच्चों या किशोरों की शोबिज में भागीदारी प्राथमिक रूप से छुट्टियों के दिनों में की जा सकती है, जिससे उसका स्कूल न छूटे।
  • निर्माता को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता होगी कि प्रोडक्शन और शूटिंग की पूरी प्रक्रिया के दौरान बच्चे के साथ दुर्व्यवहार या कोई उपेक्षा न हो।
  • बाल कलाकार एक दिन में पांच घंटे से अधिक काम नहीं करेंगे।
  • बाल कलाकार के वेतन का 20 प्रतिशत सीधे फिक्स डिपॉजिट खाते में जमा करना होगा।
  • बच्चों या किशोरों को एडल्ट कलाकारों के साथ ड्रेसिंग स्पेस या कमरा साझा करने को नहीं देना है, विशेष रूप से जब वह विपरीत जेंडर का हो।
  • अगर बच्चा छह वर्ष से कम आयु का है, तो कम से कम एक माता-पिता या एक कानूनी अभिभावक हर समय वहां उपस्थित रहेगा।

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