प्रदेश मे गुणवत्तायुक्त शाकभाजी उत्पादन के लिए सम सामयिक महत्व के कीट का उचित समय पर प्रबन्धन नितान्त आवश्यक है। वर्तमान मे तना बेधक कीट तथा फल बेधक कीट द्वारा बैगन, भिण्डी एवं कुकरबिट्स (कद्दू, लौकी, तरोई, करेला, टिण्डा खीरा आदि) की फसलों को अत्याधिक क्षति पहुचाने की सम्भावना होती है।
तना बेधक कीट बैगन, भिण्डी एवं कुकरबिट्स (कद्दू, लौकी, तरोई, करेला, टिण्डा खीरा आदि) की फसलों मे तना में छेद कर हानि पहुॅचाता है। क्षतिग्रस्त वाली जगहों पर भूरे रंग का गोंद जैसा स्राव निकलता है। प्रभावित गॅाठ के ऊपर की शाखाएं सूख जाती है। फल मक्खी फलों में डंक मार कर अण्डे देती है, जिससे सूडिया निकल कर फलों कों सडा देती है तथा फलों का आकार टेडा-मेडा छिद्रयुक्त हो जाता है।
बचाव- तना बेधक/फल बेधक कीट के नियंत्रण हेतु कीट से प्रभावित सूखे तने एव फल को तोडकर जीमन मे गाड़ देना चाहिए। ट्राइकोग्रामा के 2-3 कार्ड को प्रति हेक्टेयर साप्ताहिक अन्तराल पर खेत मे लगाने से कीट का प्रकोप कम होता है। 4 प्रतिशत नीम की गिरी (40 ग्राम नीमगिरी का चूर्ण एक ली0 में पानी मे) का घोल बनाकर 10 दिन के अन्तराल पर छिड़काब करना चाहिए। फल मक्खी के प्रकोप को रोकने के लिए मैलाथियॉन 50 ई0सी0 2 मिली लीटर प्रति लीटर पानी में छिडकाव दोहराये। मटमैले-भूरे रंग के महीन कीट जिन्हे चैक या मोयला (एफिडस) के नाम से जाना जाता है। यह पत्तियों का रस चूसकर फलस की वृद्वि एवं उत्पादन को प्रभावित करते है। इनके नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोरपिड 200 एस0 एल0 0.3 मिली लीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिडकाव कराना चाहिए। 10 मीटर के अन्तराल पर फेरोमेन ट्रेप-100 प्रति हेक्टेयर की दर से लगाकर वयस्क नर नष्ट कर देना चाहिए।
कीटनाशक के प्रयोग में बरती जाने वाली सावधानियॉ- कीटनाशक के डिबों की बच्चों व जानवरों की पहुच से दूर रखना चाहिए। कीटनाशक का छिड़काव करते समय हाथों मे दस्ताने, मुॅह को मास्क व ऑखों को चश्मा पहनकर ढक लेना चाहिए, जिससे कीटनाशी त्वचा व ऑखों मे न जाय। कीटनाशक का छिड़काव शाम के समय जब हवा का वेग अधिक न हो तब कराना चहिए अथवा हवा चलने की विपरीत दिशा मे खड़े होकर कराना चाहिए। कीटनाशक के खाली पाउच/ डिब्बों को मिट्टी में दबा देना चाहिए।

