भारत में मधुमेह और डायबिटिक फुट अल्सर की बढ़ती समस्या:डॉ अनुपम शरण

भारत में मधुमेह और डायबिटिक फुट अल्सर की बढ़ती समस्या:डॉ अनुपम शरण

सिटी रिपोर्टर प्रत्यूष पाण्डेय

लखनऊ। डॉ. अनुपम शरण , प्लास्टिक सर्जन
विनायक कॉस्मेटिक सर्जरी एंड लेज़र सेंटर , गोमती नगर , लखनऊ ने पत्रकारों को संबोधित कहते हुए प्रेसवार्ता में कहा कि हमारे समर्पित डायबिटिक फुट अल्सर क्लिनिक के शुभारंभ के अवसर पर यह आवश्यक है कि समाज और मीडिया का ध्यान मधुमेह की एक ऐसी जटिलता की ओर दिलाया जाए, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है — डायबिटिक फुट अल्सर, जो चुपचाप विकलांगता और अंग विच्छेदन का एक बड़ा कारण बन रहा है।
वैश्विक और राष्ट्रीय परिदृश्य
• नवंबर 2024 तक, पूरे विश्व में 828 मिलियन (82.8 करोड़) लोग मधुमेह से पीड़ित हैं।
• इनमें से 26% (लगभग 212 मिलियन / 21.2 करोड़) मधुमेह रोगी भारत में हैं, जिससे भारत दुनिया की मधुमेह राजधानी बन गया है।
डायबिटिक फुट अल्सर और अंग-विच्छेदन की स्थिति
• लगभग 15% से 20% मधुमेह रोगियों को जीवन में किसी न किसी समय फुट अल्सर हो सकता है।
• भारत में हर वर्ष लगभग 50,000 से 1,00,000 मरीजों को डायबिटिक फुट अल्सर के कारण अंग काटने (amputation) की आवश्यकता पड़ती है।
• यह दर्शाता है कि देश में हर 5 से 10 मिनट में एक अंग-विच्छेदन हो रहा है।
• कुल 85% निचले अंगों के amputations का कारण डायबिटिक फुट अल्सर ही होता है।
एक उपेक्षित लेकिन गंभीर समस्या पर ध्यान
इस क्लिनिक के माध्यम से हम मधुमेह की एक ऐसी जटिलता पर केंद्रित हैं जिसे समाज और चिकित्सा जगत दोनों ने अक्सर नजरअंदाज किया है — वह है डायबिटिक फुट अल्सर।
जहां अधिकतर लोग मधुमेह की आंखों (रेटिनोपैथी), हृदय, किडनी (नेफ्रोपैथी) और मस्तिष्क से जुड़ी समस्याओं के बारे में जानते हैं,
वहीं फुट अल्सर के विषय में जागरूकता बेहद कम है।
इस जागरूकता की कमी के कारण समय पर पहचान नहीं हो पाती और संक्रमण के बाद अंततः अंग-विच्छेदन की नौबत आ जाती है।
देश पर बढ़ता विकलांगता का बोझ
• ऐसे amputations से न केवल शारीरिक विकलांगता होती है, बल्कि यह मरीज और परिवार के लिए भावनात्मक, सामाजिक और आर्थिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण साबित होता है।
• इससे देश पर विकलांगता का सामूहिक बोझ भी तेजी से बढ़ रहा है।
क्लिनिक की विशेषताएं और सुविधाएं
• एंकल ब्रेकियल इंडेक्स (ABI): पैरों में रक्त संचार की जांच हेतु सरल व दर्दरहित टेस्ट।
• टो ब्रेकियल इंडेक्स (TBI): खासतौर पर डायबिटिक मरीजों में धमनियों की स्थिति जांचने के लिए।
• फुट सेंसेशन मैपिंग: नसों की क्षति (न्यूरोपैथी) की पहचान और जोखिमग्रस्त क्षेत्रों का मूल्यांकन।
• फुट प्रेशर मैपिंग: पैरों पर पड़ने वाले दबाव को मापने के लिए जिससे घाव बनने से पहले सतर्कता बरती जा सके।
• ऑफलोडिंग शू डिज़ाइन: आपके पैरों की संरचना और दबाव बिंदुओं के अनुसार बनाए गए विशेष जूते।
हम अपने प्रयासों के तहत एक निःशुल्क डायबिटिक फुट जागरूकता शिविर का आयोजन कर रहे हैं:
दिनांक: रविवार, 27 जुलाई 2025
समय: प्रातः 10:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक
स्थान: Vinayak Cosmetic Surgery & Laser Center
इस शिविर में हम निःशुल्क परामर्श और विशेष रियायती दरों पर अत्याधुनिक डायबिटिक फुट जाँच की सुविधा प्रदान कर रहे हैं:
नियमित कुल शुल्क: ₹2100
शिविर विशेष ऑफर: केवल ₹1200
इस पहल का उद्देश्य है कि सटीक जाँच और समय पर निदान सभी के लिए सुलभ और किफायती हो।
आगे की योजना और मीडिया का निरंतर सहयोग
हम अपने शहर और आसपास के क्षेत्रों में नि:शुल्क जन-जागरूकता शिविर लगाने की योजना भी बना रहे हैं,
ताकि लोगों को समय रहते सही जानकारी और बचाव के तरीके मिल सकें।
हमें यह कहने में गर्व है कि 2003 में हमारे अस्पताल की स्थापना से लेकर आज तक, आप सभी मीडिया बंधुओं का अटूट सहयोग प्राप्त होता रहा है।
चाहे वह उद्घाटन का अवसर रहा हो या बीच-बीच में अन्य प्रयास — आपका साथ हमारे लिए हमेशा प्रेरणास्रोत रहा है।
अब एक बार फिर, हम एक सामान्य लेकिन उपेक्षित जनस्वास्थ्य विषय पर केंद्रित क्लिनिक स्थापित कर रहे हैं और हमें आशा है कि आपका मार्गदर्शन और सहयोग इस जनहित के कार्य को और आगे ले जाने में हमारी मदद करेगा।

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