अयोध्या। वेज बोर्ड के निर्देशानुसार पत्रकारों और गैर पत्रकारों को भुगतान न करने पर मीडिया हाउस पर कानूनी शिकंजा कसा जाएगा ।विभिन्न मीडिया संस्थानों में कार्यरत पत्रकारों के हितों की रक्षा के लिए शासन कटिबद्ध है ।विभिन्न मीडिया संस्थानों में कार्यरत पत्रकारों के हितों की रक्षा के लिए गठित वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट में संशोधन के प्रस्ताव को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंजूरी दे दी है । यह मजीठिया वेतन बोर्ड की सिफारिशों को प्रभावी ढंग से लागू किए जाने को सुनिश्चित करता है और कानून का पालन नहीं किए जाने की स्थिति में अर्थ दंड का भी प्रावधान करता है यानि इस कानून का पालन नहीं किए जाने पर 1 साल तक की कैद की सजा का भी प्रावधान है दिल्ली वर्किंग जर्नलिस्ट संशोधन अधिनियम 2015 एक्ट के अन्य प्रावधानों में संशोधन के साथ यह तय किया गया कि अब अनुबंध यानि कॉन्ट्रैक्ट पर रखे गए पत्रकारों से भी श्रमजीवी पत्रकार यानी वर्किंग जर्नलिस्ट जैसा ही व्यवहार किया जाएगा इसके साथ ही मीडिया संस्थानों द्वारा कर्मचारियों को बकाया वेतन भुगतान न किए जाने की स्थिति में उनके ऊपर अर्थ द॔ड के साथ कारावास की अवधि भी बढ़ाई जा सकती है दिल्ली विधानसभा में वर्किंग जर्नलिस्ट अधिनियम में संशोधन के लिए दिसंबर 2015 में विधेयक पारित किया था जिसे राष्ट्रपति ने अपनी मंजूरी भी दे दी थी दिल्ली के श्रम मंत्री ने कहा कि देश में मजीठिया वेतन बोर्ड को प्रभावी ढंग से लागू करने को सुनिश्चित करने वाला दिल्ली देश का पहला राज्य बन गया संशोधित कानून के मुताबिक अब अगर नियोक्ता अपने कर्मचारियों का बकाया राशि नहीं देता है तो धारा 17 (1) की नई उप धारा में सक्षम अधिकारी 5 गुना तक की राशि बढाकर अर्थ दंड स्वरूप नियोक्ता
से वसूल सकता है साथ ही अधिनियम संख्या 45 की धारा( 18) में संशोधन करते हुए धारा (1) में आए शब्द अर्थ दंड दो ₹200 तक बढ़ाया जा सकता है की जगह को संशोधन करते हुए उसमें5000रू तक के जुर्माने के साथ कारावास भी 6 माह तक बढ़ाया जा सकता है या दोनों बढाया जा सकता है किसी पत्रकार या गैर पत्रकार कर्मचारी को देय भुगतान न करने की स्थिति में नियोक्ता कारावास के दंड का भागी होगा जो 6 माह से 1 वर्ष तक का हो सकता है।

