मेडिकल कॉलेज में जांचें ठप्प,कभी मरीज तो कभी चिकित्सक हो रहे प्रताड़ित
(राजेश श्रीवास्तव ब्यूरो चीफ अयोध्या)
अयोध्या।राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा संकट मंडरा रहा है।योगी सरकार के शासनकाल में यहां की व्यवस्थाओं का बंटाधार साफ नजर आ रहा है, जहां मरीजों को मूलभूत जांचों के लिए भी दर-दर भटकना पड़ रहा है। पिछले लगभग एक सप्ताह से मेडिकल कॉलेज की लैब में थायराइड जांच पूरी तरह ठप पड़ी हुई है।अब यह संकट और गहरा गया है, क्योंकि इलेक्ट्रोलाइट्स, ब्लड शुगर की हिस्ट्री और ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन जैसी महत्वपूर्ण जांचें भी बंद हो गई हैं। परिणामस्वरूप, मरीजों को जांच के लिए बाहर के निजी लैब में भेजा जा रहा है, जहां उन्हें भारी खर्च उठाना पड़ रहा है और समय की भी बर्बादी हो रही है।मरीजों में हाहाकार मचा हुआ है। कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज, जैसे थायराइड डिसऑर्डर, डायबिटीज और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन वाले रोगी, अब बिना जांच के इलाज कराने को मजबूर हैं। एक मरीज के तीमारदार अनीश ने बताया कि उनकी मां को थायराइड की समस्या है, लेकिन पिछले 8 दिनों से जांच नहीं हो पा रही। डॉक्टर केवल पुरानी रिपोर्ट्स के आधार पर दवा दे रहे हैं, जो जोखिम भरा है। इसी तरह डायबिटीज के मरीज HbA1c जांच न होने से अपनी स्थिति का सही आकलन नहीं कर पा रहे। कई मरीजों को लौटाया जा रहा है, जिससे उनकी परेशानी दोगुनी हो गई है। यह सिर्फ मरीजों तक सीमित नहीं है। चिकित्सक भी कॉलेज की खराब व्यवस्थाओं से बेहद परेशान हैं। हाल ही में मेडिसिन विभाग के तीन जूनियर रेजिडेंट्स (जे आर) ने प्रशासन पर प्रताड़ना का गंभीर आरोप लगाया था। उन्होंने शिकायत की कि काम के बोझ, अनियमित ड्यूटी और असहयोगी रवैये के कारण उनकी मेंटल और फिजिकल हेल्थ प्रभावित हो रही है। इसके अलावा एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अवधेश कुमार ने भी खुलकर मोर्चा खोल दिया है।उन्होंने लिखित शिकायत देकर विभागीय स्तर पर प्रताड़ना, पक्षपात का आरोप लगाया है। डॉ. कुमार का कहना है कि ऐसे माहौल में डॉक्टरों का मनोबल टूट रहा है, जो अंततः मरीजों की देखभाल पर असर डालता है।यह स्थिति योगी सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े करती है। अयोध्या जैसे पवित्र शहर में, जहां लाखों श्रद्धालु आते हैं, मेडिकल कॉलेज की ऐसी हालत चिंताजनक है। रीजेंट की कमी, मशीनों का बंद होना और प्रशासनिक लापरवाही जैसी समस्याएं बार-बार सामने आ रही हैं। पहले भी थायराइड-हार्मोन जांचें ठप होने, सीवर लाइन चोक होने और अन्य उपकरणों की खराबी की खबरें आईं थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी जांचें सरकारी अस्पताल में मुफ्त या न्यूनतम शुल्क पर उपलब्ध होनी चाहिए, लेकिन यहां मरीजों को निजी जांच पर हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखी है। कार्यवाहक प्राचार्य छुट्टी पर हैं। प्रभारी प्राचार्य डॉ डीके सिंह ने मामले को दिखवाने की बात कही है।

