मेदांता अस्पताल, लखनऊ, में वर्ल्ड न्यू बॉर्न वीक में एडवांस्ड एनआईसीयू एंबुलेंस और चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर का हुआ शुभारंभ
ब्यूरो चीफ आर एल पाण्डेय
लखनऊ। वर्ल्ड न्यू बॉर्न वीक के अवसर पर, मेदांता अस्पताल, लखनऊ ने मंगलवार को दो नई सुविधाओं की शुरुआत हुई। इनमें से एक नियो नेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) एंबुलेंस, जो नवजात शिशुओं को आपात स्थिति में तत्काल और विशेष चिकित्सा देखभाल प्रदान करेगी। दूसरी सुविधा चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर है, जो नवजात शिशुओं के विकास और समग्र स्वास्थ्य की देखभाल करेगा। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में मेदांता अस्पताल, लखनऊ के मेडिकल डायरेक्टर डॉ राकेश कपूर उपस्थित थे।
एनआईसीयू एंबुलेंस में नवजात शिशुओं के लिए आवश्यक सभी आधुनिक उपकरण और सुविधाएं हैं। यह एंबुलेंस नवजात शिशुओं को सुरक्षित और कुशलता से अस्पताल पहुंचा सकती है। चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर में नवजात शिशुओं के विकास और समग्र स्वास्थ्य की देखभाल के लिए एक्सपर्ट डॉक्टर्स और स्टाफ मौजूद रहेंगे।
इस अवसर पर बोलते हुए डॉक्टर राकेश कपूर मेडिकल डायरेक्टर मेदांता हॉस्पिटल लखनऊ ने कहा, मैं न्योनेटलॉजी डिपार्टमेंट की टीम को पूर्वांचल में अपनी तरह की पहली एनआईसीयू ऑन व्हील्स और कॉम्प्रिहेंसिव चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर शुरू करने के लिए बधाई और शुभकामनाएं देता हूं।”
उन्होंने कहा “न्यू बॉर्न वीक नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए जागरूकता के उद्देश्य से मनाया जाता है। अगर हम देखें तो नियोनेटल पीरियड में जो न्यूबॉर्न बच्चा होता है वह उसके लिए सबसे क्रूशियल पीरियड होता है, इस दौरान बच्चे की ठीक से देख भाल न होने के चलते ही नियो नेटल डेथ्स होती हैं। इस दौरान इफेक्टिव नियोनेटल मॉनिटरिंग की आवश्यकता होती है और यह लेवल थ्री एनआईसीयू में ही उपलब्ध होती है। बच्चों को इमरजेंसी में कभी कभी ऐसे एनआईसीयू में शिफ्ट करना पड़ता है, जिसके लिए स्पेशल एंबुलेंस की आवश्यकता होती है। इन एंबुलेंस में एनआईसीयू के आवश्यक इक्विपमेंट्स और स्पेशली ट्रेंड स्टाफ होता है। आजकल कई बच्चे आईवीएफ के द्वारा भी पैदा होते हैं जिन्हें प्रेशियस बेबीज कहा जाता है। हालांकि ये भी नॉर्मल डिलीवरी पीरियड में पैदा होते हैं लेकिन कभी कभी ऐसे बच्चे भी प्री मेच्योर पैदा होते हैं तो उनकी भी गहन देखभाल के लिए एनआईसीयू की सुविधाएं आवश्यक हो जाती हैं।”
एसोसिएट डायरेक्टर, न्योनेटलॉजी डॉ. आकाश पंडिता ने बताया, नवजात शिशु एक महीने से कम उम्र के बच्चे होते हैं और नवजात काल जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। बच्चों में होने वाली अधिकांश मौतें नवजात काल के दौरान होती हैं। इसके अलावा, नवजात काल लंबे समय तक शारीरिक और मानसिक विकास का आधार तैयार करता है क्योंकि शरीर के अधिकांश अंग विकास की स्थिति में होते हैं। बीमार और समय से पहले जन्म लेने वाले नवजात शिशुओं को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है और उन्हें समय से सर्वोत्तम देखभाल के लिए तुरंत लेवल 3 एनआईसीयू में स्थानांतरित करने की आवश्यकता होती है। जिसके लिए डॉक्टरों की अनुभवी टीम, नर्सों के अलावा समर्पित और विशिष्ट उपकरणों और मशीनों की आवश्यकता होती है।
उन्होंने बताया कि मेदांता लखनऊ के न्योनेटलॉज डिपार्टमेंट ने बीमार और समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों को मेदांता के एक एडवांस्ड नियो नेटल इंटेंसिव केयर यूनिट- एनआईसीयू में शिफ्ट करने के लिए एक समर्पित एंबुलेंस शुरू की है। यह लखनऊ और पूर्वांचल में अपनी तरह की पहली एनआईसीयू ऑन व्हील्स – एनआईसीयू है।
उन्होंने बताया कि मेदांता ने विशेष रूप से सक्षम बच्चों के लिए एक चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर-सीडीसी भी शुरू किया है, जो बाल फिजियोथेरेपी, व्यावसायिक चिकित्सा, स्पीच थेरेपी, बाल न्यूरोलॉजी आदि सुविधाओं कर जरिए सीडीसी यह सुनिश्चित करेगा कि रिकवरी, देरी से विकास, ऑटिज्म, एडीएचडी से पीड़ित बच्चों को नियमित रूप से एक ही छत के नीचे सर्वश्रेष्ठ देखभाल मिले सके।
मेदांता लखनऊ सेंट्रल यूपी का प्रमुख हेल्थकेयर संस्थान है, जहां 970 बिस्तरों से सुसज्जित एक अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है। एक ही छत के नीचे अनुभवी और सुपर-स्पेशियलिटी व मल्टी-स्पेशियलिटी डॉक्टरों और मेडिकल सुविधाओं से लैस मेदांता लखनऊ, सर्वोत्तम विश्व-स्तरीय स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। मेदांता लखनऊ 24/7 आपातकालीन सेवाएं गंभीर परिस्थितियों में तत्काल सहायता प्रदान करती है। अस्पताल की उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता कार्डियक, स्ट्रोक और ट्रॉमा देखभाल के लिए विशेष इकाइयों से प्रमाणित होती है, जो यह सुनिश्चित करता है कि रोगियों को इन गंभीर स्थितियों के लिए शीर्ष-स्तरीय चिकित्सा और देखभाल प्राप्त हो।

