पीएम नरेंद्र मोदी द्वार रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को दी गई यह सलाह कि ‘यह युद्ध का समय नहीं है‘, अमेरिका समेत कई देशों को रास आया है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात के बाद इस बयान का समर्थन किया। जयशंकर ने मंगलवार को वॉशिंगटन में ब्लिंकन व अमेरिकी एनएसए जेक सुलिवन से मुलाकात की।
पीएम मोदी ने पिछले सप्ताह उज्बेकिस्तान के समरकंद में हुई एससीओ शिखर बैठक के मौके पर पुतिन से मुलाकात की थी। इसमें उन्होंने रूस-यूक्रेन जंग को लेकर पुतिन से कहा था कि ‘यह जंग का वक्त नहीं है‘। इसके साथ ही उन्होंने जंग के कारण विश्व में पैदा हुए खाद्य व ईंधन तथा उर्वरक संकट का भी जिक्र कर रूसी राष्ट्रपति से रास्ता निकालने का अनुरोध किया था।
जयशंकर ने कल ब्लिंकन से वॉशिंगटन में मुलाकात की। इसके बाद दोनों नेताओं ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें ब्लिंकन ने शुरुआत ही पीएम मोदी के उक्त कथन और यूएन महासभा में जयशंकर के भाषण में कही गई बातों से की। यूएन में जयशंकर ने कहा था कि भारत शांति और यूएन चार्टर के पक्ष में है, ब्लिंकन ने इसका जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका की भी यही राय है।
ब्लिंकन से मुलाकात में जयशंकर ने यूक्रेन जंग को लेकर भारत की स्थिति फिर स्पष्ट की। उन्होंने रूस और यूक्रेन के बीच अनाज की खेप की आवाजाही को लेकर हुई वार्ता में मदद में भारत की भूमिका और विश्व के विभिन्न नेताओं के बीच मतभेदों के अलावा ईंधन संकट जैसे खास मुद्दों पर भी बात की। रूसी तेल की कीमतों पर प्राइस कैप का जिक्र आया तो भारतीय विदेश मंत्री ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर जोर दिया।
जयशंकर व ब्लिंकन ने बढ़ती भारत-अमेरिका साझेदारी की सराहना की। जयशंकर ने कहा कि दुनिया की दिशा को आकार देने के लिए अमेरिका के साथ काम करना बहुत सकारात्मक और उत्साहजनक अनुभव है। ब्लिंकन ने अमेरिका-भारत संबंधों को हर महत्वपूर्ण वैश्विक चुनौती से निपटने में दुनिया में सबसे अधिक सार्थक साझेदारी बताया। उन्होंने कहा वे इस बात से संतुष्ट हैं कि दोनों पक्षों ने सब मुद्दों पर बात की।
सुलिवन से यूक्रेन व हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर चर्चा
विदेश मंत्री जयशंकर ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन से भी मुलाकात की। उन्होंने भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने, गहरा करने और स्वतंत्र और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को आगे बढ़ाने के तरीकों पर विचार किया। जयशंकर वॉशिंगटन की चार दिनी सरकारी यात्रा पर आए हैं।
जयशंकर ने ट्वीट कर बताया कि ‘अमेरिका-भारत सामरिक साझेदारी को गहरा करने, यूक्रेन में रूस के युद्ध के प्रभावों को कम करने और एक स्वतंत्र, खुले, सुरक्षित और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के विकास पर साझा प्रयासों को लेकर सुलिवन के साथ विमर्श किया।‘
बता दें, अमेरिका और भारत समेत कई अन्य विश्व शक्तियां हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को देखते हुए स्वतंत्र , खुले और संपन्न हिंद-प्रशांत क्षेत्र का विकास चाहती हैं। चीन विवादित दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है, हालांकि ताइवान, फिलीपींस, ब्रुनेई, मलेशिया और वियतनाम इसके कुछ हिस्सों पर दावा करते हैं। वहीं, चीन ने दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम द्वीप और सैन्य अड्डे बना लिए हैं।

