राप्ती की कटान से मिट गया जगदीशपुर गांव का अस्तित्व

क्राइम ब्यूरो प्रशांत तिवारी
विकास खण्ड बड़हलगंज के जगदीशपुर गांव पर राप्ती नदी कुछ इस तरह मेहरबान हुई कि आज उस गांव का भौगोलिक पृष्ठभूमि ही मिट गया है ।
सन 2007-08 से राप्ती नदी उस गांव पर कटान करना चालू की थी और आज 2021 में लभगभ 198-200 घरों की बस्ती को काटते हुए 13 वर्षो में उस गांव का इतिहास ही मिटा दी ।
बता दे कि इधर पिछले दो दिनो मे राप्ती नदी के कटान का भयानक मंजर देखने को मिला है कटान की दहलीज पर खड़ी संजय पाण्डेय संगम पाण्डेय की आलीशान मकान पूरी तरह कट कर बह गयी कटान की जिद अपनी आलीशान मकान को जाते देख संजय पांडेय संगम पाण्डेय पूरी तरह टूट कर रोने लगे रोते बिलखते संजय पांडेय ने बताया कि मकान में 10 कुंतल गेंहू रखे थे चौकी कुर्सी मेज चारपाई पशुओं के लिए रखा लगभग 12 कुंतल भूषा सब मकान के साथ नदी में विलीन हो गया ।पिछले दो तीन वर्षो से राप्ती नदी के कटान में घर कट जाने से बगल में झोपड़ी अल्बेस्टर डालकर किसी तरह जीवन यापन करने वाले मुन्ना पाण्डेय रामौज पाण्डेय रमेश पाण्डेय सदाफल यादव बाबूराम यादव पंकज यादव पन्नेलाल यादव धुपचन्द विश्वकर्मा रामदयाल गोंड़ बन्धु यादव संगम गोंड़ आज पूरी तरह राप्ती के कटान से घर विहीन हो गए ।जगदीशपुर गांव के कटान पीड़ितों का दर्द ह्रदय को झकझोर दे रहा है ।
जगदीशपुर गांव के इतिहास पर प्रकाश डाले तो गांव के ही विशम्भर तिवारी मणि तिवारी सुरेंद्र पाण्डेय सहित अन्य लोगो का कहना है कि भगवान राम इसी क्षेत्र से जाते समय रुके थे तो डेरवा का नाम डेरवा पड़ा और उन्ही के अनुयायी जगदीशपुर गांव का था जो कहा कि इधर जगदीश आये है तो गांव का नाम जगदीशपुर पड़ा ।जिस जगदीशपुर गांव पर राप्ती नदी रौद्र रूप धारण करते हुए अपनी लीला से एक साथ हस खेल रही जिंदगी को तीतर बितर कर दी लोग सड़कों पर पालथिन तले व भाड़े की मकान में शरण लिए हुए है ।जगदीशपुर गांव के लोगो की पीड़ा को बयां करते हुए कलम रुक जा रही है ।

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