2 फरवरी: रामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
जो आपन चाहै कल्याना ।
सुजसु सुमति सुभ गति सुख नाना ।।
सो परनारि लिलार गोसाईं ।
तजउँ चउथि के चंद कि नाई ।।
( सुंदरकांड 37/3)
राम राम जी 🙏🙏
लंका जल जाने के बाद मंदोदरी रावण को बहुत समझाती है, रावण उसकी बात नहीं मानता है, फिर विभीषण जी आते हैं , वे कहते हैं कि भैया ! यदि आप अपना कल्याण , सुयश व शुभ गति , सुख चाहते हैं तो श्री जानकी जी को वापस कर दीजिए, श्री जानकी जी का त्याग कर दीजिए ।
आत्मीय जन ! हमारी सारी व्यथा का कारण ही पराये चीज़ों को ग्रहण करना है। अतः पराए चीजों का त्याग कर केवल स्व के चीजों को ग्रहण करें । स्व केवल भगवान हैं, श्री राम जी हैं और श्री राम ग्रहण (भक्ति) में ही सुमति, सुयश एवं नाना प्रकार के सुख ही सुख हैं । अतः पराए को त्यागे, श्री राम जी को ग्रहण करें और सतत श्री सीताराम नाम का भजन करते रहें । अथ…..श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩

