1 मार्च : रामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
समिटि समिटि जल भरहिं तलावा।
जिमि सदगुन सज्जन पहिं आवा ।।
सरिता जल जलनिधि महुँ जाई ।
होइ अचल जिमि जिव हरि पाई।।
( किष्किंधाकांड 13/4)
जय सियाराम🙏🙏
सुग्रीव को राजा बना कर श्री राम जी प्रवर्षण पर्वत पर वास कर रहें हैं । वर्षा ऋतु का वर्णन करते हुए वे लक्ष्मण से कहते हैं कि जल धीरे धीरे-धीरे एकत्र होकर तालाबों में भर रहा है , जैसे सद्गुण एक एक करके सज्जन के पास आते हैं । नदी का जल समुद्र में जाकर वैसे ही स्थिर हो जाता है जैसे भगवान को पाकर जीव अचल (आवागमन से मुक्त) हो जाता है ।
बंधुवर ! जैसे नदी का जल सागर में मिल जाने पर स्थिर हो जाता है उसी तरह जीव जब श्री राम जी के भक्ति में लग जाता है और श्री राम जी में रम जाता है तो उसके भी कार्य, व्यवहार,आचार, विचार में स्थिरता आ जाती है । अतः अपने जीवन में एकरूपता, स्थिरता लाने के लिए श्री राम जी की भक्ति में लगें, श्री राम में रमें । अथ…..श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरुण जी लखनऊ

