लेख:ढाका रहस्य:क्या प्रधानमंत्री मोदी की हत्या की साज़िश थी या किसी अन्य अमेरीकी गुप्त ऑपरेशन का हिस्सा?

#ढाका रहस्य:क्या प्रधानमंत्री मोदी की हत्या की साज़िश थी या किसी अन्य अमेरीकी गुप्त ऑपरेशन का हिस्सा?🤔🕵️‍♂️🇮🇳

अभी चार-पांच दिन पहले ही हम सबने आपके ही लेख से जाना था कि ढाका के वेस्टिन होटल में 31 अगस्त को #अमेरिकी सेना के बेहद गुप्त और ताकतवर अधिकारी “टेरेंस अरवेल जैक्सन” की संदेहास्पद मौत ने पूरी दुनिया की खुफिया एजेंसियों को हिला दिया। ( लेख का लिंक कमेंट बॉक्स में)

“टेरेंस अरवेल जैक्सन” की मौत महज़ एक #दुर्घटना नहीं, बल्कि एक जटिल अंतर्राष्ट्रीय खेल का हिस्सा हो सकती है जिसके केंद्र में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बदलते वैश्विक गठजोड़ हैं।

#कांग्रेसी उनके चमचे पत्रकार, यू-ट्यूबिये और उनका ईकोसिस्टम भी अनायास ही नहीं बार बार बांग लगा रहा है कि मोदी सरकार 6 महीने में जाने वाली है, कुछ तो खेल है।

अमेरिकी #खुफिया अधिकारी “टेरेंस अरवेल जैक्सन”, जो 1st स्पेशल फोर्सेस कमांड(Airborne) के कमांड इंस्पेक्टर #जनरल थे, की मृत्यु के आसपास की परिस्थितियां अत्यंत संदिग्ध हैं। 50 वर्षीय जैक्सन, जो उत्तरी कैरोलिना के रेफोर्ड निवासी थे, 20 से अधिक वर्षों से अमेरिकी सेना में सेवारत थे और एशिया थिएटर में कई युद्धक तैनातियों में भाग ले चुके थे।

लेकिन उनकी मौत को ढाका #पुलिस ने चौंकाने वाली तेजी से “नेचुरल कॉज़” बता दिया—और मजे की बात, पोस्टमार्टम तो हुआ ही नहीं! यूएस एम्बेसी ने उनके शव को तुरंत अपने कब्जे में ले लिया, जैसे कोई सबूत मिटाने की दौड़ लगी हो।

ढाका पुलिस के #इंस्पेक्टर (ऑपरेशन) मिज़ानुर रहमान के अनुसार, “जैक्सन” “कई महीनों से व्यावसायिक यात्रा पर बांग्लादेश में थे और 29 अगस्त को होटल में चेक इन किया, 31अगस्त की शाम होटल स्टाफ को चिंता हुई, क्यूंकि दो दिनों से उसने खाने का कुछ भी ऑर्डर नहीं किया था। जब उसके रूम के फोन पर उनसे संपर्क करने की कोशिश की गयी तो कोई जवाब नहीं मिला”।

ढाका पुलिस का झूठ तो इसी बात से पकड़ा गया कि “जैक्सन” का कमरा #यूएस एंबेसी के माध्यम से बुक कराया गया था, फिर भला वो निजी व्यावसायिक यात्रा पर कैसे था!

यूएस #एंबेसी को पहले से ही उसकी उपस्थिति की जानकारी थी,इसी लिये होटल स्टाफ ने एक साथ दोनों को सूचित किया, ढाका पुलिस और यूएस एंबेसी को। ढाका पुलिस ने एंबेसी अधिकारियों के आने के बाद ही होटल का वो रूम खोला, तो क्या कहीं से उसे ऐसे निर्देश दिये गये थे!!

एंबेसी की ही #मेडिकल टीम ने शव की जांच कर ढाका पुलिस को मृत्यु का प्राकृतिक कारण बताने को कहा।

यह पूरी प्रक्रिया असामान्य रूप से तेज़ थी – खोज से लेकर शव को एंबेसी को सौंपने तक सब कुछ चंद घंटों में हो गया।

जो सबसे संदेहास्पद है, वह यह है कि पुलिस को #पोस्टमार्टम की अनुमति नहीं दी गई और अमेरिकी दूतावास ने तुरंत शव और सभी सामान को अपने कब्जे में ले लिया।

#होटल के एक अनाम कर्मचारी ने बताया कि दूतावासी अधिकारियों द्वारा जब्त किए गए सामान में कई नक्शे, स्केच और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण थे, साथ ही तीन बड़े सूटकेस और लैपटॉप भी थे। इससे स्पष्ट है कि जैक्सन बांग्लादेश में “बिज़नेस कवर” के नाम पर बेहद गुप्त मिशन पर थे; उसी दौरान अमेरिका के पूर्व #राजदूत “पीटर हास” भी घुमंतू ‘प्राइवेट विजिट्स’ पर ढाका में देखे गए। गुप्त मुलाकातें, सर्विलांस ग्रिड्स, और बड़े ऑपरेशंस की खुसर-फुसर सुर्खियां बन चुकी थीं। आखिर यूएस स्पेशल फोर्सेज का इतना बड़ा नाम वहाँ क्यों था?

यह सब कुछ तब हो रहा था जब #एससीओ समिट में चीन, रूस और भारत ट्रम्प के व्यापार युद्ध के खिलाफ एकजुट हो रहे थे। क्या जैक्सन मोदी को निशाना बनाने के किसी ऑपरेशन की शुरुआत करने के लिये भेजे गया था?

कुछ रिपोर्ट्स कहती हैं — उन्हें लॉन्च से पूर्व ही #अज्ञात लोगों ने निपटा दिया…या फिर — जब विदेशी खुफिया एजेंसियों को भनक लग गई तो उसे अमेरिकी एजेंट्स ने ही “#साइलेंट” कर दिया?

“जैक्सन: की मृत्यु के समानांतर, भारतीय खुफिया एजेंसियों की निगाह बांग्लादेश में अमेरिका के पूर्व राजदूत “पीटर हास” की गतिविधियों पर भी टिकी हुई है। “हास”, जो कहने को अब टेक्सास स्थित एक्सेलरेट एनर्जी के #Strategic Adviser हैं, पिछले एक वर्ष में सैर सपाटे और घूमने के नाम पर कम से कम छह बार बांग्लादेश जा चुके हैं।

ताज्जुब की बात यह है कि क्या जो व्यक्ति दो साल #बांग्लादेश में राजदूत के रूप में तैनात था तो वो वहां नहीं घूमा,जो रिटायरमेंट के बाद से कम से कम 6 बार बांग्लादेश जा चुका है।

“हास” पर आरोप है कि उन्होंने 2023 के मध्य से जुलाई 2024 तक शेख हसीना सरकार को गिराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। #भारतीय खुफिया सूत्रों के अनुसार, “हास” ने तत्कालीन अमेरिकी सहायक राज्य सचिव “डोनाल्ड लू” के साथ मिलकर “स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव” के नारे के तहत एक व्यापक रणनीति तैयार की।

5 अगस्त को, “हास” की कॉक्स बाज़ार में नेशनल कोऑर्डिनेशन प्लेटफॉर्म (#NCP) के पांच प्रमुख नेताओं – हसनत अब्दुल्लाह, सरजीस आलम, तसनीम ज़ारा, नसीरुद्दीन पटवारी और खालेद सैफुल्लाह के साथ बैठक हुई। ये सभी नेता तथाकथित छात्र आंदोलन के हिस्से थे, जिसने हसीना सरकार के खिलाफ आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अक्टूबर-नवंबर 2023 में “हास” ने श्रीलंका और मुंबई की “गुप्त यात्राएं” कीं – जो आधिकारिक तौर पर “छुट्टी” के नाम पर थीं, लेकिन वास्तव में अमेरिकी #सिक्योरिटी ऑफिसियल्स से मिलने के लिए थीं।

इसी बीच, #चीन के तियांजिन में आयोजित SCO समिट में एक अभूतपूर्व घटना घटी। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अपनी #बख्तरबंद ऑरस लिमोसिन में 10 मिनट इंतज़ार किया। जो 15 मिनट की यात्रा होनी चाहिए थी, वह लगभग एक घंटे तक चली क्योंकि दोनों नेताओं ने होटल पहुंचने के बाद भी कार में ही अपनी बातचीत जारी रखी, वो भी बिना किसी दुभाषिए या सहयोगी के।

विशेषज्ञों का कहना है कि पुतिन की बख्तरबंद लिमोसिन (कार), जिसमें पुतिन और मोदी की बातचीत हुई, अत्याधुनिक सुरक्षा तकनीकों से लैस होती है जिससे कोई बाहरी व्यक्ति (जैसे खुफिया एजेंसी, जासूस या हैकर) उनकी बातचीत को चुपके से सुन या रिकॉर्ड नहीं सकता।

भारतीय खुफिया विश्लेषकों का मानना है कि पुतिन की लंबी और गुप्त बातचीत का उद्देश्य मोदी को किसी संभावित खतरे के बारे में चेतावनी देना हो सकता है। #रूसी खुफिया एजेंसियों की वैश्विक पहुंच और उनकी अमेरिकी गतिविधियों पर निगरानी को देखते हुए,इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि जैक्सन के मिशन की जानकारी रूसियों को मिल गई हो।

यह भी उल्लेखनीय है कि “जैक्सन” की मृत्यु ठीक उसी समय हुई जब एससीओ समिट में भारत, चीन और रूस के बीच नई साझेदारी का प्रदर्शन हो रहा था।

भारतीय खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी एजेंसियों ने USAID के कवर के तहत दोहा, दुबई और पाकिस्तानी शहरों में बांग्लादेशी छात्र कार्यकर्ताओं से गुप्त बैठकें कीं। पाकिस्तानी #आईएसआई के वरिष्ठ अधिकारी भी इन छात्र समूहों से मिले।

नवंबर 2023 में वाशिंगटन डीसी में एक बैठक हुई जिसकी अध्यक्षता पूर्व अमेरिकी राजदूत “विलियम मिलम” ने की, जो उस समय वुडरो विल्सन इंटरनेशनल सेंटर फॉर स्कॉलर्स में सीनियर पॉलिसी स्कॉलर थे। इस बैठक में ही बांग्लादेश में राजनीतिक बदलाव की अंतिम रणनीति तय की गई।

अनसुलझे प्रश्न ?

“टेरेंस अरवेल जैक्सन” की रहस्यमय मृत्यु, पीटर हास की बार-बार की यात्राएं, और एससीओ समिट में मोदी-पुतिन की गुप्त वार्ता – ये सभी घटनाएं एक जटिल भू-राजनीतिक पहेली का हिस्सा प्रतीत होती हैं। क्या “जैक्सन” वाकई किसी गुप्त मिशन पर था? क्या उसकी मृत्यु प्राकृतिक थी या किसी बड़े खेल का हिस्सा?

क्योंकि #भू-राजनीति में संयोग नहीं, सिर्फ़ ऑपरेशन —और न्यूट्रलाइजेशन होते हैं। सवालों पर परदा है, और जवाब साये में हैं। क्या मोदी वाकई दुनिया के सबसे खतरनाक षड़यंत्र के चक्रव्यूह का लक्ष्य थे? या ये सब महाशक्तियों के खेल का एक हिस्सा है? ताश के पत्तों की ये गुप्त बाजी, जिसे जानने की हसरत हर किसी को है, फिलहाल साये में ही है।

शतरंज के खेल में, हर चाल के पीछे गहरी रणनीति छुपी होती है। ढाका की यह घटना महज़ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक बड़ी तस्वीर का छोटा सा हिस्सा हो सकती है।

✍️ Pankaj kumar rai

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