वाराणसी की शहद विदेशों में घोलेगी मिठास, साल भर में करीब 36 टन होता है उत्पादन

वाराणसी के शाहंशाहपुर स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर) में शहद प्रोसेसिंग इकाई का विस्तार किया जाएगा। यहां प्रोसेसिंग करके शहद को निर्यात के मानक के अनुसार बनाया जाएगा। इससे शहद विदेशों में भेजी जा सकेगी और मधुमक्खी पालकों को फायदा होगा।

किसान उत्पादक संगठन के निदेशक पवन सिंह ने बताया कि पहले बड़ागांव में प्रोसेसिंग इकाई स्थापित करने की योजना थी। लेकिन अब यह सुविधा आईआईवीआर में मिलने वाली है। मंडल के करीब 300 से अधिक मधुमक्खी पालक यहां अपने उत्पाद की प्रोसेसिंग कराकर बेच सकेंगे।

जिला उद्यान अधिकारी सुभाष कुमार ने बताया कि जिले में 75 किसान साल भर में करीब 36 टन शहद का उत्पादन करते हैं। एक बॉक्स 20 से 50 किलो तक शहद सहित मोम, पराग, प्रापलिस और रायल जैली का उत्पादन होता है। प्रोसेसिंग न होने से शहद स्थानीय बाजार में ही बिक पाती है। प्रोसेसिंग के बाद शहद की शुद्धता बढ़ जाएगी और विदेशों में बेची जा सकेगी।

 

आईआईवीआर में मामूली शुल्क लेकर प्रोसेसिंग की सुविधा दी जाएगी। साथ निर्यात के मानकों के आधार पर पैकिंग भी जाएगी। इसके बाद इसे बाहर निर्यात किया जा सकेगा। प्रोसेसिंग के बाद शहद के जमने की समस्या समाप्त हो जाएगी और इसे ज्यादा समय तक इस्तेमाल किया जा सकेगा।
– डॉ. टीके बेहेरा, निदेशक आईआईवीआर

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