शहरी जलधाराओं की सुरक्षा के लिये शुरू की गयी ट्रैश शील्ड प्लान योजना
कचरा अवरोधक सुदृढ़ करने के लिये एचडीबी फाइनेंशियल ने
सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एजुकेशन के साथ हाथ मिलाया
लखनऊ। प्लास्टिक प्रदूषण की बढ़ती चुनौती का समाधान करने और शहरी जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से, एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज (एचडीबीएफएस) ने सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एजुकेशन (सीईई) के साथ साझेदारी में लखनऊ में ‘ट्रैश शील्ड प्लान’ शुरू किया है। इस योजना का उद्देश्य स्मार्ट कचरा अवरोधकों (ट्रैश बैरियर्स) की स्थापना के साथ-साथ सामुदायिक स्तर पर अन्य ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पहलों को लागू करना है। यह पहल लखनऊ की चयनित शहरी नहरों के हिस्सों में तैरते हुए कचरे के प्रबंधन पर केंद्रित है, जिनमें पकरिया घाट और हनुमान सेतु के आसपास के क्षेत्र शामिल हैं। इन स्थानों पर भौगोलिक स्थिति और उपयोग के पैटर्न के कारण विभिन्न प्रकार का कचरा प्रवाह होता है। रणनीतिक स्थानों पर स्मार्ट ट्रैश बैरियर्स की स्थापना के माध्यम से, यह परियोजना तैरते हुए मलबे को नीचे की ओर बड़े जलस्रोतों में जाने से रोकने का प्रयास करती है।
स्थानीय रूप से डिजाइन और निर्मित ये ट्रैश बैरियर्स किफायती और मॉड्यूलर प्रकृति के हैं, जिससे इन्हें विभिन्न चौड़ाई और जल प्रवाह दर वाली जलधाराओं में आसानी से स्थापित किया जा सकता है। एकत्रित कचरे को साफ कर नगर निकायों को सौंप दिया जाता है, ताकि उसका पर्यावरण-अनुकूल तरीके से निपटान किया जा सके या उसे मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटीज में भेजा जा सके, जहां आगे पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) की प्रक्रिया की जाती है। इस प्रकार व्यवस्थित निपटान यह सुनिश्चित करता है कि अपशिष्ट प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र में प्रवेश न करे और साथ ही नगर निकायों की मौजूदा अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली को भी सुदृढ़ करता है। यह पहल निर्धारित स्थानों पर प्लास्टिक कचरे को अनुमानित रूप से 50 प्रतिशत तक कम करती है और महत्वपूर्ण नदियों एवं समुद्री पर्यावरण में प्लास्टिक मलबे के प्रवेश को रोकती है। इसके माध्यम से हर वर्ष लगभग 80दृ100 टन प्लास्टिक और अन्य मलबे का संग्रहण संभव हो पाता है, जिससे जलीय आवासों के पुनर्स्थापन में मदद मिलती है और जल गुणवत्ता संकेतकों में लगभग 30 प्रतिशत तक सुधार होता है। इसके अतिरिक्त, कचरे के जमाव से होने वाले नालों के अवरोध को समाप्त कर बाढ़ के जोखिम को कम किया जाता है और शहरी जल प्रणालियों को अधिक स्वस्थ बनाने में योगदान मिलता है।
इस परियोजना में एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज के सहयोग पर टिप्पणी करते हुए, एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ पीपल एंड ऑपरेशंस, आशीष घाटनेकर ने कहा,“एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज में हमारे लिए स्थिरता केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे तंत्र विकसित करने के बारे में है जो समुदायों को साझा संसाधनों के संरक्षण में भागीदारी करने में सक्षम बनाते हैं। लखनऊ में ट्रैश शील्ड पहल का समर्थन करके, हम स्वच्छ जलधाराओं में योगदान देने के साथ-साथ सामुदायिक स्तर पर जिम्मेदार अपशिष्ट प्रथाओं को भी प्रोत्साहित कर रहे हैं। सीईई के साथ सहयोग हमें अवसंरचना समाधान को जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन के साथ जोड़ने का अवसर देता है, जिससे शहरी पारिस्थितिक तंत्र पर दीर्घकालिक प्रभाव सुनिश्चित होता है।”
इस पहल पर बोलते हुए, सीईई की सीनियर प्रोग्राम डायरेक्टर, सुश्री प्रीति आर. कनौजिया ने कहा, “नहरें और शहरी जल निकासी तंत्र अक्सर नदी प्रणालियों में प्रवेश करने वाले प्लास्टिक कचरे के प्रारंभिक मार्ग होते हैं। लखनऊ में एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज के साथ यह साझेदारी एक व्यावहारिक और विस्तार योग्य मॉडल प्रस्तुत करती है, जो अवसंरचना समाधान को सामुदायिक सहभागिता और व्यवहार परिवर्तन के साथ एकीकृत कर स्रोत स्तर पर प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने का प्रयास करती है।” ट्रैश शील्ड पहल को भारत के विभिन्न स्थानों पर लागू किया जा चुका है, जहां तमिलनाडु, अहमदाबाद, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में नहर एवं जलस्रोत पुनर्स्थापन परियोजनाएं पहले ही संचालित की जा चुकी हैं।

