श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

14 जुलाई- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

समिटि समिटि जल भरहिं तलावा
जिमि सदगुन सज्जन पहिं आवा
सरिता जल जलनिधि महुँ जाई ।
होइ अचल जिमि जिव हरि पाई
( किष्किंधाकांड 13/4)
राम राम 🙏🙏
बालि को मारकर राम जी ने सुग्रीव को राजा बना दिया है तथा स्वयं वर्षा ऋतु में प्रवर्षन पर्वत पर रह रहें हैं । लक्ष्मण जी से वर्षा का वर्णन करते हुए वे कहते हैं कि वर्षा का जल एकत्र हो – होकर तालाबों में भर रहा है जैसे सद्गुण सज्जनों के पास एक एक करके चले आते हैं । नदी का जल सागर में जाकर वैसे ही स्थिर हो जाता है जैसे जीव भगवान को पाकर अचल हो जाता है ।
जगत में लगें रहने के कारण हमारे जीवन में स्थिरता नहीं है परंतु जैसे ही आप जगदीश में लगते हैं जीवन स्थिर व शांत हो जाता है , जीवन में स्थायित्व आ जाता है । अत: जीवन की बेवजह की झंझटों से आप छुटकारा पाना चाहते हैं तो अपने को राम जी के साथ बस एकीकृत कर लें । अथ ! जय जय राम, जय जय राम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

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