श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

13 अगस्त – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

राम सदा सेवक रुचि राखी ।
बेद पुरान साधु सुर साखी ।।
अस जियँ जानि तजहु कुटिलाई
करहु भरत पद प्रीति सुहाई ।।
( अयोध्याकाण्ड 218/4)
राम राम 🙏🙏
भरत जी के चित्रकूट जाते समय उनका प्रेम देखकर देवराज इंद्र डर जाते हैं और गुरुदेव बृहस्पति जी से कहते हैं कि आप कुछ ऐसा कीजिए जिससे राम व भरत की भेंट न हो अन्यथा बनी बात भी बिगड़ जाएगी । बृहस्पति जी उन्हें समझाते हैं और कहते हैं कि राम जी सदैव अपने सेवकों ( भक्तों ) की इच्छा पूरी करते हैं , वेद , पुराण , साधु व देवता इसके साक्षी हैं ।ऐसा समझ कर आप कुटिलता त्याग कर भरत जी को प्रेम करो ।
राम जी को अपने सेवक भाते हैं , राम जी उनकी इच्छाओं का ध्यान रखते हैं परंतु क्या हम राम जी की इच्छाओं का ध्यान रखते हैं , नहीं? इसीलिए हमारी यह गति है । राम जी के वचनों का पालन कर हम आप राम सेवक बन सकते हैं । जीवन में दूसरों के प्रति समता , ममता व आदर का पालन कर हम राम सेवक हो सकते हैं । अथ ! जय राम सेवा , है प्रेम देवा ! जय राम सेवा , है प्रेम देवा 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

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