16 अगस्त- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
बारि मथें घृत होइ बरु
सिकता ते बरु तेल ।
बिनु हरि भजन न भव तरिअ
यह सिद्धांत अपेल ।।
( उत्तरकांड, दो. 122)
राम राम 🙏🙏
काकभुसुंडि जी ने गरूड महराज को भक्ति मणि की महिमा व उनके सात प्रश्नों का उत्तर दिया है । मानस रोगों को बताने के बाद वे कहते हैं कि चाहे जल को मथने से भले ही घी उत्पन्न हो जाए और बालू को पेरने से भले ही तेल निकल आवे , परंतु श्रीहरि के भजन बिना संसार रूपी सागर से पार नहीं जाया जा सकता है , यह सिद्धांत अटल है ।
जो नियम अटल है उसे हम आप कैसे टाल सकते हैं ? अस्तु ! जगत की कठिनाइयों को आसान करने का एक मात्र उपाय राम भजन , सियाराम भजन है । अत: भजें ! जय राम , जय राम , जय जय राम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

