26 जनवरी – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
राम भगति निरुपम निरूपाधी ।
बसइ जासु उर सदा अबाधी ।।
तेहि बिलोकि माया सकुचाई ।
करि न सकइ कछु निज प्रभुताई
( उत्तरकांड 115/3-4)
राम राम 🙏🙏
गरूड महराज जी को भक्ति के बारे में बताते हुए काकभुसुंडि जी कहते हैं कि राम जी की विशुद्ध भक्ति जिसके भी ह्रदय में बिना किसी बाधा के बसती है , उस भक्ति को देखकर माया संकोच करती है तथा उस पर अपना कुछ भी प्रभाव नहीं दिखा पाती है ।
श्री राम जी को भक्ति भाती है , जबकि जीव को माया लुभाती है । यदि राम भक्ति हमारे ह्रदय में बस जाए तो माया जनित परेशानी से हमें मुक्ति मिल सकती है । अतएव भक्ति करें , राम भक्ति करें । अथ ! जय जय राम भगति , जय सियाराम भगति 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

