3 अप्रैल – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
सुनहु राम अब कहउँ निकेता ।
जहाँ बसहु सिय लखन समेता ।।
जिन्ह के श्रवन समुद्र समाना ।
कथा तुम्हारि सुभग सरि नाना ।
भरहिं निरंतर होहिं न पूरे ।
तिन्ह के हिय तुम्ह कहुँ गृह रूरे ।
( अयोध्याकाण्ड 127/2-3)
राम राम 🙏🙏
बाल्मीकि जी से श्री राम जी द्वारा यह पूछने पर कि मैं कहाँ निवास करूँ, बाल्मीकि जी कहते हैं कि जिनके कान समुद्र की भाँति आपकी सुंदर कथारूपी अनेकों नदियों से भरते रहते हैं परंतु कभी तृप्त नहीं होते हैं , उनके हृदय आपके लिए सुंदर घर हैं ।
अपनी ब्यथा की कथा के आगे हम भगवान की कितनी कथा सुनते हैं ? विचार कीजिए इसीलिए वे हमसे दूर हैं । उनकी समीपता चाहिए तो बस उनकी कथा सुनें और निरंतर नाम भजन करते रहें……. श्री राम जय राम जय जय राम, श्री राम जय राम जय जय राम । सीताराम जय सीताराम, सीताराम जय सीताराम। जय सियाराम जय जय सियाराम, जानकीवल्लभ राजाराम ।
🚩🚩🚩 संकलन तरूण जी लखनऊ

